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फायर एंड फॉरगेट तकनीक से लैस जैवलिन की एंट्री

Ratna Netam
28 Aug 2026 3:44 PM IST
फायर एंड फॉरगेट तकनीक से लैस जैवलिन की एंट्री
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दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बड़ा कदम सामने आया है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि भारत अत्याधुनिक **जैवलिन एंटी टैंक मिसाइल सिस्टम** खरीदने की योजना बना रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस सौदे को दोनों देशों के रक्षा संबंधों को मजबूत करने वाला कदम बताया है।
जैवलिन दुनिया के सबसे आधुनिक और खतरनाक एंटी टैंक हथियारों में गिना जाता है। यह खास तौर पर दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे सैनिक कंधे से लॉन्च कर सकते हैं और मिसाइल लॉन्च होने के बाद खुद लक्ष्य को ट्रैक करती है।
क्या है जैवलिन एंटी टैंक सिस्टम?
जैवलिन एक पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है, जिसे अमेरिकी कंपनियां लॉकहीड मार्टिन और आरटीएक्स मिलकर बनाती हैं। यह "फायर एंड फॉरगेट" तकनीक पर आधारित है, यानी सैनिक को मिसाइल दागने के बाद लगातार लक्ष्य पर निशाना साधने की जरूरत नहीं होती। मिसाइल खुद अपने लक्ष्य को पहचानकर उस पर हमला करती है।
इस सिस्टम को आधुनिक युद्ध में टैंकों के खिलाफ बेहद प्रभावी माना जाता है। इसे दुनिया के कई देशों की सेनाएं इस्तेमाल करती हैं और कई संघर्षों में इसकी क्षमता साबित हो चुकी है।
कितनी घातक है जैवलिन मिसाइल?
जैवलिन की सबसे बड़ी ताकत इसकी सटीक मारक क्षमता है। यह दुश्मन के टैंक के कमजोर हिस्सों को निशाना बना सकती है। खास तौर पर यह टैंक के ऊपरी हिस्से पर हमला करने में सक्षम है, जहां सुरक्षा अपेक्षाकृत कम होती है।
इसकी कुछ प्रमुख खूबियां:
फायर एंड फॉरगेट तकनीक – मिसाइल छोड़ने के बाद ऑपरेटर सुरक्षित स्थान पर जा सकता है।
* **इन्फ्रारेड सीकर** – यह गर्मी के संकेतों के आधार पर लक्ष्य को पहचानती है।
* **टॉप अटैक क्षमता** – टैंक के सबसे कमजोर हिस्से पर हमला करती है।
* **मोबाइल सिस्टम** – सैनिक इसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकते हैं।
भारतीय सेना को क्यों जरूरत है?
भारत की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। देश को सीमाओं पर खासकर पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिक हथियारों की जरूरत है। चीन और पाकिस्तान दोनों के पास बड़ी संख्या में बख्तरबंद वाहन और टैंक मौजूद हैं। ऐसे में जैवलिन जैसे हथियार भारतीय सेना की एंटी-आर्मर क्षमता को मजबूत कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक युद्ध में सिर्फ बड़े टैंक ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि उन्हें रोकने के लिए छोटे, तेज और सटीक हथियार भी बेहद जरूरी हो गए हैं।
चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में अहमियत
भारत लंबे समय से सीमाओं पर अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। जैवलिन सिस्टम मिलने से भारतीय सैनिकों को दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ अतिरिक्त ताकत मिलेगी।
खासकर ऐसे इलाकों में जहां बड़े हथियारों को पहुंचाना मुश्किल होता है, वहां पोर्टेबल मिसाइल सिस्टम काफी प्रभावी साबित हो सकते हैं।
भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में नया अध्याय
जैवलिन सौदा भारत और अमेरिका के बढ़ते रक्षा सहयोग का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों देश पिछले कुछ वर्षों में रक्षा तकनीक, सैन्य अभ्यास और रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहे हैं।
अमेरिकी राजदूत ने कहा है कि यह समझौता दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग के नए अवसर पैदा करेगा। हालांकि, इस सौदे में कितनी मिसाइलें और कितने लॉन्चर खरीदे जाएंगे, इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
क्या भारत में बनेगा जैवलिन?
भारत लगातार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर काम कर रहा है। ऐसे में भविष्य में तकनीक हस्तांतरण और भारत में उत्पादन की संभावनाओं पर भी नजर रहेगी। भारत पहले भी कई विदेशी रक्षा प्रणालियों के साथ स्थानीय निर्माण की कोशिश करता रहा है।
युद्ध के मैदान में क्यों बदल सकता है तस्वीर?
आज के युद्ध में टैंक अब भी महत्वपूर्ण हथियार हैं, लेकिन एंटी टैंक मिसाइलों ने उनकी चुनौती बढ़ा दी है। जैवलिन जैसे हथियार छोटे दस्तों को भी बड़ी सैन्य ताकत के खिलाफ प्रभावी जवाब देने की क्षमता देते हैं।
अगर भारतीय सेना में यह सिस्टम शामिल होता है तो सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों की क्षमता बढ़ेगी और दुश्मन के बख्तरबंद हमलों को रोकने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर जैवलिन एंटी टैंक सिस्टम भारत की सैन्य ताकत में एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी साबित हो सकता है। यह सिर्फ एक हथियार खरीद नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध की जरूरतों के हिसाब से भारतीय सेना को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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