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दिल्ली में आज से गैर-BS6 गाड़ियों की एंट्री बंद, 31 जनवरी तक लागू रहेगा नियम

Kavita2
1 Nov 2026 11:34 AM IST
दिल्ली में आज से गैर-BS6 गाड़ियों की एंट्री बंद, 31 जनवरी तक लागू रहेगा नियम
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण और राजनीतिक आयोजनों के कारण रविवार, 1 नवंबर 2026 से यातायात व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। दिल्ली सरकार ने शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत दूसरे राज्यों में पंजीकृत गैर-BS6 पेट्रोल और डीजल वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह प्रतिबंध 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग और दिल्ली यातायात पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों में विशेष जांच चौकियां स्थापित की हैं। यहां आने-जाने वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन और प्रदूषण मानकों की जांच की जा रही है।

दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। खासकर अक्टूबर से जनवरी के बीच मौसम संबंधी परिस्थितियों, वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण गतिविधियों और अन्य प्रदूषणकारी स्रोतों के कारण हवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसी समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने इस बार शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण उपायों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।

दूसरे राज्यों के गैर-BS6 वाहनों पर प्रतिबंध

नई व्यवस्था के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत ऐसे पेट्रोल और डीजल वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी, जो BS6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं। यह नियम मुख्य रूप से पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों पर लागू होगा।

हालांकि, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस विशेष प्रतिबंध से छूट दी गई है। एंबुलेंस, दमकल और पुलिस जैसे आपातकालीन एवं सरकारी ड्यूटी वाले वाहनों के लिए भी निर्धारित छूट लागू होगी। BS6 मानकों वाले दूसरे राज्यों के वाहन संबंधित नियमों और आवश्यक दस्तावेजों के साथ दिल्ली में प्रवेश कर सकेंगे।

इस प्रतिबंध का उद्देश्य दिल्ली की सड़कों पर पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या कम करना है। खासकर दूसरे राज्यों से आने वाले ऐसे वाहनों पर निगरानी बढ़ाई गई है, जिनका उत्सर्जन स्तर निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।

बॉर्डर पर बनाए गए विशेष जांच केंद्र

नए नियमों को लागू करने के लिए परिवहन विभाग और दिल्ली यातायात पुलिस की ग्राउंड प्रवर्तन टीमें सक्रिय हो गई हैं। राजधानी में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों पर विशेष जांच चौकियां स्थापित की गई हैं। इन स्थानों पर सुरक्षाकर्मी और परिवहन विभाग के अधिकारी वाहनों की जांच कर रहे हैं।

जांच के दौरान वाहन का रजिस्ट्रेशन, ईंधन का प्रकार, BS6 उत्सर्जन मानक और वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) जैसे दस्तावेजों पर ध्यान दिया जा रहा है। स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (ANPR) और अन्य तकनीकी माध्यमों से भी नियमों का पालन सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।

दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपने वाहन का उत्सर्जन मानक और जरूरी दस्तावेज जांच लें। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को प्रवेश से रोका जा सकता है।

CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगी राहत

शीतकालीन प्रतिबंधों में CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को विशेष छूट दी गई है। ऐसे वाहन दूसरे राज्यों में पंजीकृत होने के बावजूद इस विशेष BS6 प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे। वहीं, BS6 पेट्रोल और डीजल वाहन भी निर्धारित नियमों के तहत दिल्ली में प्रवेश कर सकेंगे।

इसके अलावा वाहन चालकों के लिए वैध PUC प्रमाणपत्र रखना भी जरूरी है। दिल्ली सरकार की व्यवस्था के अनुसार, वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं होने पर पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से इनकार किया जा सकता है। यह व्यवस्था प्रदूषण नियंत्रण के व्यापक अभियान का हिस्सा है।

राजनीतिक रैलियों के कारण भी बढ़ी यातायात की चुनौती

दिल्ली में रविवार को विपक्षी गठबंधन INDIA की 'चलो दिल्ली' महारैली के कारण भी यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। रामलीला मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा मध्य दिल्ली में अन्य राजनीतिक गतिविधियों और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए हैं।

दिल्ली पुलिस ने प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की है और वाहनों की जांच बढ़ाई है। रामलीला मैदान के आसपास यातायात डायवर्जन लागू किए गए हैं। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू वाहन प्रतिबंध और राजनीतिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था के कारण राजधानी में वाहन चालकों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सर्दियों में प्रदूषण कम करने के लिए कई अन्य प्रतिबंध भी

दिल्ली सरकार की शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण योजना केवल वाहनों तक सीमित नहीं है। इसके तहत पार्किंग शुल्क भी 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक दोगुना किया गया है। इसका उद्देश्य निजी वाहनों के अनावश्यक इस्तेमाल को हतोत्साहित करना है।

इसके अलावा सरकारी और निजी कार्यालयों में 1 नवंबर से 31 जनवरी तक 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू करने का प्रावधान किया गया है। कार्यालयों के समय में बदलाव और निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण जैसे उपाय भी योजना का हिस्सा हैं।

निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए भी विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। धूल पैदा करने वाली कई बाहरी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। संबंधित विभागों को नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

वाहन चालकों के लिए क्या जरूरी है?

दिल्ली आने की योजना बना रहे वाहन चालकों को सबसे पहले अपने वाहन का पंजीकरण और उत्सर्जन मानक जांचना चाहिए। दूसरे राज्यों में पंजीकृत BS-IV या उससे पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। BS-VI, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को निर्धारित शर्तों के अनुसार प्रवेश मिलेगा।

इसके साथ ही वैध PUC प्रमाणपत्र और वाहन के अन्य आवश्यक दस्तावेज रखना भी जरूरी है। व्यावसायिक वाहन और अंतरराज्यीय बसों के लिए अलग से लागू उत्सर्जन और परमिट संबंधी नियमों का पालन करना होगा।

दिल्ली सरकार और यातायात पुलिस का उद्देश्य सर्दियों में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करना और राजधानी की हवा की गुणवत्ता में सुधार करना है। हालांकि, इन प्रतिबंधों का वास्तविक प्रभाव वाहनों की संख्या, नियमों के पालन और प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर नियंत्रण जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल 1 नवंबर से लागू नई व्यवस्था के बाद दिल्ली की सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अगले तीन महीने तक गैर-BS6 पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। ऐसे में दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को यात्रा से पहले नियमों की जानकारी लेना बेहद जरूरी है।

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