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Patna में गंगा घाटों से हटेंगे अतिक्रमण, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

नई दिल्ली। नदियों के किनारे अवैध कब्जों और अनधिकृत निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने बिहार सरकार को पटना में गंगा नदी के किनारे नौजर घाट से नूरपुर घाट तक हुए सभी गैरकानूनी कब्जों और अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि यह पूरी कार्रवाई छह हफ्तों के भीतर पूरी की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि नदी क्षेत्र में किसी भी तरह का अवैध कब्जा पर्यावरण और नदी के प्राकृतिक स्वरूप के लिए नुकसानदायक है। अदालत ने कहा कि तय समय सीमा के अंदर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए और इसमें किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
कोर्ट ने बिहार सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक एक जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई की पूरी जानकारी के साथ हलफनामा दाखिल करें। इस रिपोर्ट में अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों और अब तक हुई प्रगति का पूरा विवरण देना होगा।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नदी किनारे अवैध निर्माण को लेकर चिंता जताई। अदालत का कहना है कि नदियों के किनारे होने वाले अनियोजित निर्माण और कब्जे से नदी के बहाव पर असर पड़ता है। इससे पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है और भविष्य में बाढ़ जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के वृंदावन में यमुना नदी के किनारे चल रहे निर्माण कार्यों से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई की। अदालत ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने 23 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
वृंदावन में यमुना किनारे हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नदी का प्राकृतिक प्रवाह बनाए रखना बेहद जरूरी है। अदालत ने आशंका जताई कि यदि नदी किनारे लगातार निर्माण होते रहे तो इससे यमुना का रास्ता संकरा हो सकता है और नदी के बहाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। साथ ही यमुना नदी के किनारे किसी भी नए निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि इस दौरान किसी भी तरह का नया निर्माण न हो।
विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों के किनारे अतिक्रमण और अवैध निर्माण लंबे समय से एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बने हुए हैं। नदी के प्राकृतिक क्षेत्र में बदलाव होने से जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होती है और कई बार बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों को नदियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि नदी क्षेत्रों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है।
अब बिहार सरकार और संबंधित प्रशासन को छह सप्ताह के भीतर गंगा किनारे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी करनी होगी। वहीं वृंदावन में यमुना किनारे निर्माण कार्यों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी।





