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भारत-चीन संबंधों पर स्थिरता और भरोसे पर जोर, सीमा वार्ता के 25वें दौर की तैयारी

Kavita2
23 Jun 2026 10:24 AM IST
भारत-चीन संबंधों पर स्थिरता और भरोसे पर जोर, सीमा वार्ता के 25वें दौर की तैयारी
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New Delhi नई दिल्ली : भारत ने चीन के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर “स्थिर, अनुमान लगाने योग्य और रचनात्मक” माहौल बनाए रखने पर जोर दिया है। दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन से जुड़े नए तरीकों पर चर्चा के लिए इस वर्ष के अंत में होने वाली सीमा वार्ता के 25वें दौर की तैयारी भी शुरू हो गई है।

इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई, जहां भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने ब्रिक्स (BRICS) बैठक के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इस बैठक को भारत-चीन संबंधों में हालिया संवाद प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में हाल के घटनाक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत में सीमावर्ती क्षेत्रों में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में हुई प्रगति पर विशेष ध्यान दिया गया।

बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन के बीच स्थिर, अनुमान लगाने योग्य और रचनात्मक द्विपक्षीय संबंध दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संबंध न केवल आपसी भरोसे को मजबूत करते हैं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच बेहतर समझ और सहयोग को भी बढ़ावा देते हैं।

सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने सीमा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया और भविष्य की वार्ता प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर सहमति व्यक्त की। यह वार्ता सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर केंद्रित होगी।

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कई दौर की बातचीत के बावजूद पूरी तरह से समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में दोनों देशों के बीच लगातार संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाना कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस बैठक को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान बढ़ रहा है। BRICS जैसे मंचों पर भारत और चीन की भागीदारी भी द्विपक्षीय संबंधों को संवाद के जरिए आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आपसी संवाद को जारी रखना और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना दोनों देशों के हित में है। साथ ही यह भी माना गया कि संबंधों में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता से बचने के लिए नियमित संपर्क आवश्यक है।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि पिछले कुछ समय में संबंधों में जो तनाव की स्थिति बनी थी, उसमें धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है। दोनों पक्ष इस सुधार को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करने पर सहमत हुए हैं।

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भारत-चीन संबंधों में एक व्यावहारिक और संवाद आधारित दृष्टिकोण को दर्शाती है। सीमा वार्ता का 25वां दौर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, जिससे सीमा प्रबंधन और आपसी विश्वास को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

फिलहाल दोनों देश इस बात पर सहमत दिखाई दे रहे हैं कि स्थिर और पूर्वानुमान योग्य संबंध न केवल द्विपक्षीय हितों के लिए आवश्यक हैं, बल्कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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