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पराली प्रबंधन की बंद मशीनें चालू कराने पर जोर, केंद्र ने राज्यों को दिए निगरानी बढ़ाने के निर्देश

nidhi
14 Oct 2026 8:03 AM IST
पराली प्रबंधन की बंद मशीनें चालू कराने पर जोर, केंद्र ने राज्यों को दिए निगरानी बढ़ाने के निर्देश
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शिवराज और भूपेंद्र यादव ने राज्यों से तेज कार्रवाई को कहा

नई दिल्ली: धान की कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार, 13 अक्टूबर को हुई उच्चस्तरीय बैठक में मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में फसल अवशेष प्रबंधन की स्थिति पर चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रशासन को जमीनी स्तर पर तेजी से कदम उठाने को कहा।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि धान की कटाई और अगली रबी फसल की बुवाई के बीच सीमित समय उपलब्ध है। इसलिए संबंधित विभागों को अपनी योजनाओं का तत्काल क्रियान्वयन करना होगा। राज्यों से जिलाधिकारियों के साथ बैठकें करके प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करने और किसानों के लिए व्यावहारिक व्यवस्था बनाने को कहा गया। केंद्र ने पराली प्रबंधन के काम में तेजी लाने पर जोर दिया है। समीक्षा के दौरान अलग-अलग राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं की स्थिति सामने रखी गई। कृषि मंत्री ने बताया कि 15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले हरियाणा में घटनाएं 53.3 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में करीब 32 प्रतिशत कम हुई हैं। पंजाब में भी कमी दर्ज हुई है। हालांकि, मध्यप्रदेश और राजस्थान में बढ़ोतरी ने सरकार की चिंता बढ़ाई है।

मध्यप्रदेश में पराली जलाने के मामले 55 से बढ़कर 277 हो गए, जबकि राजस्थान में इनकी संख्या 20 से बढ़कर 60 पहुंच गई। कृषि मंत्री ने दोनों राज्यों को प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान कर विशेष कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए। जिन राज्यों में घटनाएं कम हुई हैं, उन्हें भी सतर्क रहने को कहा गया, क्योंकि फसल की कटाई का बड़ा हिस्सा अभी बाकी है।
किसानों को विकल्प उपलब्ध कराना भी बैठक का प्रमुख विषय रहा। कृषि मंत्री ने जोर दिया कि केवल पराली नहीं जलाने की सलाह से समस्या का समाधान नहीं होगा। किसानों तक ऐसे साधन पहुंचाने होंगे, जिनका इस्तेमाल आसान हो और खर्च भी उनकी पहुंच में रहे। पराली को खेत में मिलाकर जैविक खाद बनाने तथा खेत से बाहर ऊर्जा उत्पादन और पशु चारे में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनों के इस्तेमाल में कमियां भी सामने आईं। केंद्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, पंजाब में लगभग 40 प्रतिशत और हरियाणा में 48 प्रतिशत पुरानी मशीनें निष्क्रिय या गैर-कार्यशील मिलीं। केंद्र ने नई मशीनें उपलब्ध कराने के साथ पुरानी मशीनों की तत्काल मरम्मत कराने को कहा। कस्टम हायरिंग केंद्र सक्रिय करने और छोटे तथा सीमांत किसानों को किफायती दरों पर मशीनें उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
केंद्र अब तक राज्यों को 3.54 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध करा चुका है। इनमें चालू वित्त वर्ष की 26,109 नई मशीनें शामिल हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए योजना के तहत 592.57 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनमें से 430.87 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। बैठक में उपलब्ध धन के उपयोग में तेजी लाने पर भी जोर दिया गया।
पराली के उपयोग के लिए किसानों को ताप विद्युत संयंत्रों, कंप्रेस्ड बायोगैस और दूसरी पीढ़ी के जैव-एथनॉल संयंत्रों से जोड़ने की बात कही गई। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में इसे पशु चारे के लिए सुरक्षित रखने और कम अवधि वाली धान की किस्मों को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए, ताकि कटाई के बाद अगली फसल की तैयारी के लिए अधिक समय मिल सके।
पर्यावरण मंत्री ने निगरानी के लिए केवल उपग्रह आंकड़ों पर निर्भर नहीं रहने को कहा। जिलाधिकारियों को जमीनी आकलन, गश्त और उड़नदस्तों के जरिए निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए। विशेष रूप से दोपहर तीन बजे के बाद निगरानी मजबूत करने पर जोर रहा। केंद्र ने तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय सहयोग के साथ राज्यों से समन्वित प्रयास करने को कहा है।

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