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PM Modi के नॉर्वे दौरे से पहले भारत-नॉर्वे संबंधों पर जोर

Kavita2
18 May 2026 9:57 AM IST
PM Modi के नॉर्वे दौरे से पहले भारत-नॉर्वे संबंधों पर जोर
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Delhi दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे से पहले भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं। नॉर्वे में भारत की राजदूत ग्लोरिया गंगटे ने दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग पर जोर देते हुए कहा है कि यह दौरा रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ग्लोरिया गंगटे ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी का नॉर्वे का पहला आधिकारिक दौरा है और भारत से किसी प्रधानमंत्री की पिछली नॉर्वे यात्रा 43 साल पहले हुई थी। उन्होंने कहा कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) भी महत्वपूर्ण चरण में है।

उन्होंने बताया कि इस समझौते के तहत EFTA देशों द्वारा अगले 15 वर्षों में लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश भारत में किया जाएगा, जिससे करीब 10 लाख रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। यह समझौता भारत के आर्थिक विकास और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को नॉर्वे पहुंचेंगे और तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरान वे नॉर्वे के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। यह दौरा भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग को और गहरा करने के उद्देश्य से बेहद अहम माना जा रहा है।

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे के किंग हेराल्ड V और क्वीन सोनजा से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे, जिसमें व्यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

भारत की ओर से इस दौरे में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार जैसे वैश्विक मुद्दों को प्रमुखता से उठाए जाने की उम्मीद है। भारतीय पक्ष लंबे समय से UNSC में सुधार की मांग करता रहा है ताकि वैश्विक संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत और नॉर्डिक देशों के बीच बढ़ते विश्वास और साझेदारी का प्रतीक है। दोनों पक्षों के बीच हरित ऊर्जा, तकनीक, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं।

फिलहाल इस दौरे को भारत की विदेश नीति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और मजबूत कर सकता है।

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