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नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं में कई तरह की चिंताएं बनी हुई हैं। खासकर उन लोगों में डर है जिनका नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नहीं मिल रहा है। इसी बीच दिल्ली के उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रशांत कुमार प्रसाद ने मतदाताओं की परेशानियों को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि 2002 की सूची में नाम नहीं मिलने से घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और दस्तावेजों का प्रावधान किया गया है।
दिल्ली में चल रही SIR प्रक्रिया के तहत सभी मतदाताओं को एन्युमरेशन फॉर्म उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब इन फॉर्म को जमा कराने की प्रक्रिया जारी है। फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख 8 अगस्त निर्धारित की गई है। हालांकि कई मतदाता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर उनका नाम पुरानी मतदाता सूची से लिंक नहीं हुआ तो कहीं उनका नाम वर्तमान सूची से हटा न दिया जाए।
उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रशांत कुमार प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में लिंक नहीं मिलने वाले मतदाताओं के लिए भी नियम बनाए गए हैं। ऐसे लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। एन्युमरेशन फॉर्म के पीछे 12 तरह के दस्तावेजों की सूची दी गई है। इनमें से एक या दो वैध दस्तावेज उपलब्ध होने पर भी काम हो सकता है।
उन्होंने बताया कि ऐसे मतदाताओं को अपना और अपने माता-पिता का भारतीय जन्म प्रमाण उपलब्ध कराना होगा। इसके अलावा पहचान और नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों में पासपोर्ट, सरकारी आवास या जमीन आवंटन पत्र, सरकारी आवास प्रमाण पत्र, दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे।
प्रशांत कुमार प्रसाद ने कहा कि अगर 17 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम नहीं मिलता है, तब भी उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है। ड्राफ्ट सूची के बाद 17 अगस्त से 16 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया जाएगा। इस दौरान संबंधित व्यक्ति फॉर्म नंबर-6 भरकर जरूरी दस्तावेजों के साथ अपना दावा पेश कर सकता है। जांच के बाद पात्र लोगों का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल नए वोट बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह शुरू नहीं हुई है। नए मतदाताओं के आवेदन स्वीकार किए जा सकते हैं, लेकिन नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद शुरू होगी। 19 अक्टूबर को फाइनल मतदाता सूची जारी होने के बाद नए वोट बनाने का काम शुरू किया जाएगा।
SIR प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की भूमिका को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। कई क्षेत्रों में मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि BLO घर-घर जाकर फॉर्म जमा नहीं कर रहे हैं। इस पर चुनाव अधिकारी ने कहा कि सभी BLO की जिम्मेदारी तय की गई है। उनके क्षेत्र में वितरित किए गए हर फॉर्म का हिसाब लिया जाएगा। अगर कोई घर बंद मिलता है तो वहां सूचना के लिए स्टीकर लगाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है। किसी भी BLO द्वारा लापरवाही या बहाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है ताकि कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न हो।
दस्तावेजों को लेकर भी कई मतदाताओं के मन में सवाल हैं। इस पर उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर एन्युमरेशन फॉर्म जमा करते समय दस्तावेज देना अनिवार्य नहीं है। हालांकि जिन लोगों का वर्ष 2002 की मतदाता सूची से लिंक नहीं मिल रहा है, उन्हें भविष्य की जांच प्रक्रिया के लिए दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है।
उन्होंने विदेशी नागरिकता से जुड़े मामलों पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के परिवार में कोई विदेशी महिला विवाह के बाद भारत आई है और उसके पास भारतीय दस्तावेज नहीं हैं, तो पहले उसे भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करना होगा। नागरिकता मिलने के बाद ही मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
वहीं, वर्ष 2002 की मतदाता सूची में माता-पिता के नाम या EPIC नंबर में गलती होने पर भी मतदाताओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है। अधिकारी ने कहा कि फॉर्म में वही जानकारी दर्ज करें जो पुरानी सूची में मौजूद है। बाद में दावा-आपत्ति प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-8 के माध्यम से सुधार कराया जा सकता है। EPIC नंबर उपलब्ध नहीं होने पर उस कॉलम को खाली छोड़ा जा सकता है।
चुनाव विभाग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे समय सीमा के भीतर अपने एन्युमरेशन फॉर्म जमा करें और किसी भी भ्रम की स्थिति में आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है, ताकि सभी पात्र नागरिकों का नाम सुरक्षित रहे।





