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राज्यसभा की 12 सीटों पर चुनावी हलचल

Kavita2
23 Sept 2026 10:07 AM IST
राज्यसभा की 12 सीटों पर चुनावी हलचल
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की 11 राज्यसभा सीटों के द्विवार्षिक चुनाव और पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक उत्तर प्रदेश की 10, उत्तराखंड की एक और पश्चिम बंगाल की एक सीट के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर विभिन्न मीडिया आकलनों में भाजपा की राज्यसभा सदस्य संख्या में एक सीट की शुद्ध बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों, मतदान और आधिकारिक नतीजों के बाद ही साफ होगी।

16 अक्टूबर को होगा मतदान

निर्वाचन आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए चुनाव कराया जाएगा। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में खाली हुई एक सीट पर उपचुनाव होगा। मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना होगी। चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर, जांच 7 अक्टूबर और नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर निर्धारित है।

उत्तर प्रदेश की नौ और उत्तराखंड की एक सीट मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा होने के कारण खाली हो रही हैं। उत्तर प्रदेश की एक अन्य सीट भाजपा सांसद दिनेश शर्मा के 11 सितंबर को इस्तीफा देने के बाद पहले ही खाली हो चुकी है। उन्हें अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया था।

यूपी की 10 सीटों पर सबसे ज्यादा नजर

इस चुनाव में सबसे अधिक राजनीतिक दिलचस्पी उत्तर प्रदेश की 10 सीटों को लेकर है। वर्तमान स्थिति में इनमें आठ सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि एक समाजवादी पार्टी और एक बहुजन समाज पार्टी के पास है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा के आठ और समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवारों के चुने जाने की संभावना से जुड़े आकलन सामने आए हैं। विधानसभा में भाजपा के 256 और समाजवादी पार्टी के 101 विधायक बताए गए हैं, जबकि एनडीए के अन्य घटक दलों के पास भी विधायक हैं। एक राज्यसभा सीट के लिए करीब 36 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ने का आकलन है।

इस स्थिति में समाजवादी पार्टी अपनी मौजूदा एक सीट के स्थान पर दो सीट हासिल कर सकती है। दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी की मौजूदा राज्यसभा सीट उसके हाथ से निकल सकती है क्योंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा में अब उसका कोई विधायक नहीं है।

उत्तराखंड की सीट पर भी चुनाव

उत्तराखंड से भाजपा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। राज्य की 70 सदस्यीय विधानसभा के मौजूदा राजनीतिक समीकरण के कारण इस सीट पर भी भाजपा की स्थिति संख्या बल के लिहाज से मजबूत मानी जा रही है।

इस तरह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की 11 सीटों में भाजपा अपनी मौजूदा संख्या को मोटे तौर पर बरकरार रख सकती है, जबकि वास्तविक शुद्ध बढ़ोतरी पश्चिम बंगाल के उपचुनाव के परिणाम से जुड़ी हो सकती है।

पश्चिम बंगाल की सीट से बदल सकता है गणित

पश्चिम बंगाल की एक राज्यसभा सीट पर भी 16 अक्टूबर को उपचुनाव होगा। यह सीट तृणमूल कांग्रेस की सांसद रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। निर्वाचित होने वाले सदस्य का कार्यकाल 2 अप्रैल 2032 तक रहेगा।

हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद बदले विधानसभा संख्या बल के आधार पर भाजपा को इस सीट पर लाभ मिलने का आकलन किया जा रहा है। यही सीट भाजपा की राज्यसभा संख्या में संभावित एक सीट की शुद्ध बढ़ोतरी का आधार है। वर्तमान में भाजपा के राज्यसभा में 116 सदस्य बताए गए हैं।

NDA की संख्या पर भी पड़ेगा असर

राज्यसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की मौजूदा संख्या 150 बताई गई है। यदि मौजूदा विधानसभा अंकगणित के अनुरूप परिणाम आते हैं तो एनडीए की सदस्य संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। एक प्रकाशित आकलन में चुनाव के बाद एनडीए की संख्या 154 तक पहुंचने की संभावना बताई गई है।

हालांकि राज्यसभा का वास्तविक दलगत गणित केवल इन 12 चुनावों से निर्धारित नहीं होता। रिक्त सीटों, मनोनीत सदस्यों, सहयोगी दलों की स्थिति और अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों से भी संख्या बदल सकती है। इसलिए संभावित आंकड़ों को अंतिम परिणाम के बजाय मौजूदा संख्या बल पर आधारित आकलन के रूप में देखना जरूरी है।

BSP के लिए अहम चुनाव

राज्यसभा चुनाव बहुजन समाज पार्टी के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश से BSP के रामजी गौतम का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। मौजूदा विधानसभा संख्या बल में BSP के पास अपने उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने के लिए विधायक नहीं हैं।

लोकसभा में भी BSP का फिलहाल कोई सांसद नहीं है। ऐसे में यदि पार्टी राज्यसभा की सीट बरकरार नहीं रख पाती है तो उसका संसद के दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा।

उम्मीदवारों के नामों पर बढ़ेगी सरगर्मी

चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद अब भाजपा और समाजवादी पार्टी में उम्मीदवारों के नाम सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल होंगे। उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में राज्यसभा उम्मीदवारों का चयन सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भाजपा की ओर से उत्तर प्रदेश की आठ संभावित सीटों के लिए किन नेताओं को उम्मीदवार बनाया जाएगा, इस पर निगाह रहेगी। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के पास मौजूदा संख्या बल के आधार पर दो उम्मीदवार उतारने की गुंजाइश दिखाई दे रही है।

2027 से पहले यूपी में राजनीतिक परीक्षा

उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले होने वाला राज्यसभा चुनाव दलों को अपने विधायकों की एकजुटता और राजनीतिक समीकरण देखने का अवसर देगा। इसके कुछ समय बाद स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की विधान परिषद सीटों के चुनाव भी होने हैं।

फिलहाल विधानसभा संख्या बल के आधार पर भाजपा को उत्तर प्रदेश में आठ और समाजवादी पार्टी को दो सीटें मिलने का आकलन है। उत्तराखंड में भाजपा की स्थिति मजबूत है, जबकि पश्चिम बंगाल के उपचुनाव से भाजपा की कुल राज्यसभा संख्या में एक सीट बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। वास्तविक स्थिति 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी।

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