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UAE बैंक लोन घोटाला मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 32 लाख रुपए की अचल संपत्ति कुर्क
SHIDDHANT
25 Feb 2026 8:05 PM IST

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Delhi दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोच्चि जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई करते हुए 24 फरवरी को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत एक अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई के तहत केरल के कासरगोड में स्थित अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है। कुर्क की गई संपत्तियां सुलेमान सीटी, नफीसत ओटी और मोहम्मद सिनान सुलेमान के नाम पर दर्ज हैं। एक पंजीकृत मूल्यांकक के अनुसार, इन संपत्तियों का कुल उचित बाजार मूल्य लगभग 32 लाख रुपए है।
ईडी की ओर से बुधवार को जारी प्रेस नोट के अनुसार, जांच एजेंसी ने यह जांच कासरगोड के चंदेरा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह मामला भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत दर्ज किया गया था। शिकायत इन्वेस्ट बैंक पीएससी (यूएई स्थित बैंक) के अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा दी गई थी। जांच में यह सामने आया कि अब्दुर्रहिमान चेनोथ थिरुथुम्मल ने अबू धाबी (यूएई) में संचालित अपनी कंपनी हेक्सा ऑयल एंड गैस सर्विसेज एलएलसी के माध्यम से वर्ष 2013 से 2017 के बीच इन्वेस्ट बैंक से लगभग 68.159 मिलियन एईडी (यूएई दिरहम) का क्रेडिट लिया।
आरोप है कि यह ऋण फर्जी वित्तीय विवरण प्रस्तुत कर और धन के उपयोग के उद्देश्य को गलत तरीके से दर्शाकर प्राप्त किया गया। हालांकि, यह लोन व्यवसाय विकास के लिए स्वीकृत हुआ था, लेकिन जांच में पाया गया कि इसका एक बड़ा हिस्सा बैंकिंग चैनलों के माध्यम से भारत भेज दिया गया। यह राशि एक्सिस बैंक में संचालित एनआरई खाते सहित विभिन्न माध्यमों से ट्रांसफर की गई।
पीएमएलए की जांच में यह सामने हुआ कि अपराध से अर्जित आय के रूप में लगभग 4,60,61,357 रुपए भारत में अब्दुर्रहिमान के एनआरई खाते में प्राप्त हुए। इसमें से 34,66,787 रुपए की राशि अप्रैल 2014 से मार्च 2017 के बीच कई किश्तों में उनके भाई सुलेमान सीटी को भेजी गई। पीएमएसए की धारा 50 के तहत दर्ज बयान में सुलेमान ने इस राशि को प्राप्त करने की बात स्वीकार की। जांच में यह भी सामने आया कि इस धन का अधिकांश हिस्सा कासरगोड में एक आवासीय मकान के निर्माण में लगाया गया।
इसके बाद साल 2022 में सुलेमान सीटी ने इस संपत्ति के बड़े हिस्से को मात्र 4.50 लाख रुपए के नाममात्र मूल्य पर अपनी पत्नी नफीसत ओटी और बेटे के नाम ट्रांसफर कर दिया। नफीसत ने अपने बयान में स्वीकार किया कि इस लेनदेन में कोई वास्तविक भुगतान नहीं हुआ था। ईडी के अनुसार, यह संपत्ति को जांच और कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए किया गया शाम/बेनामी ट्रांसफर था।
इस मामले में पहले ही लगभग 4.55 करोड़ रुपए की संपत्तियों की कुर्की की जा चुकी है, जिसे निर्णायक प्राधिकरण द्वारा पुष्टि मिल चुकी है। साथ ही, एर्नाकुलम स्थित विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत भी दायर की जा चुकी है। ईडी ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
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