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ED ने वेदांता के मुंबई और दिल्ली ऑफिस में की छापेमारी, FEMA के तहत जांच जारी

Mumbai मुंबई : एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने मंगलवार को वेदांता ग्रुप के मुंबई और दिल्ली स्थित ऑफिसों में सर्च ऑपरेशन चलाया। यह कार्रवाई कंपनी द्वारा अपनी पेरेंट कंपनी को किए गए रॉयल्टी भुगतान से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच के तहत की गई है।
अधिकारियों ने बाद में पुष्टि की कि यह पूरा मामला फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के प्रावधानों के तहत जांचा जा रहा है। ED की टीमों ने दोनों शहरों में स्थित दफ्तरों में दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी का फोकस कंपनी के रॉयल्टी पेमेंट स्ट्रक्चर, विदेशी लेन-देन और संबंधित कंपनियों के बीच हुए वित्तीय ट्रांजैक्शन पर है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इन भुगतान प्रक्रियाओं में विदेशी मुद्रा नियमों का सही तरीके से पालन किया गया था या नहीं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब देश में रेगुलेटरी एजेंसियां विदेशी भुगतान और फॉरेन एक्सचेंज ट्रांजैक्शन से जुड़े मामलों की व्यापक जांच कर रही हैं। हाल के महीनों में ऐसे कई मामलों में कंपनियों की अनुपालन प्रक्रिया (compliance) को लेकर सवाल उठे हैं, जिसके चलते जांच एजेंसियों ने निगरानी और तेज कर दी है।
ED अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं, जिनकी आगे जांच की जाएगी। यह भी संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में संबंधित अधिकारियों और वित्तीय टीमों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
वेदांता ग्रुप की ओर से इस कार्रवाई पर अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि कंपनी सूत्रों का कहना है कि वे जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं और सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रॉयल्टी भुगतान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और नियमों का पालन बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसमें विदेशी मुद्रा का उपयोग और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन शामिल होते हैं। FEMA के तहत ऐसी जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सभी वित्तीय लेन-देन कानूनी ढांचे के भीतर किए गए हों।
इस छापेमारी के बाद कॉर्पोरेट और वित्तीय जगत में भी हलचल देखी गई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की जांचें कंपनियों के अनुपालन ढांचे पर ध्यान केंद्रित करती हैं और लंबे समय में कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने में मदद करती हैं।
ED की यह कार्रवाई फिलहाल शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।





