दिल्ली-एनसीआर

रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले में ED का एक्शन

Ratna Netam
14 Oct 2026 8:13 PM IST
रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले में ED का एक्शन
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नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने ओशन सेवन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड (OSBPL), उसके प्रमोटर स्वराज सिंह यादव और उनकी पत्नी सुनीता स्वराज से जुड़ी 136.42 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को ईडी ने बताया कि यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत की गई है। इस नई कार्रवाई के बाद मामले में अब तक अटैच की गई संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 188 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियों में राजस्थान और हरियाणा में स्थित जमीन तथा बैंक खातों में जमा धनराशि शामिल है। राजस्थान के जयपुर और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों में स्थित जमीन के कई भूखंडों को इस कार्रवाई के दायरे में लिया गया है। इसके अलावा हरियाणा के गुरुग्राम स्थित सेक्टर-102 में एक आवासीय भूखंड भी अटैच किया गया है।
ईडी ने कंपनी, उसके प्रमोटर स्वराज सिंह यादव और उनकी पत्नी सुनीता स्वराज से जुड़े पांच बैंक खातों में जमा राशि को भी अटैच किया है। इन खातों में मौजूद कुल 69 लाख 6 हजार 133 रुपये की राशि को चल संपत्ति के रूप में कार्रवाई के दायरे में शामिल किया गया है।
जांच एजेंसी ने बताया कि यह मामला रियल एस्टेट परियोजनाओं में कथित धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित है। ईडी ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा, हरियाणा पुलिस और राजस्थान पुलिस की ओर से दर्ज विभिन्न प्राथमिकियों के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।
इन प्राथमिकियों में ओशन सेवन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, उसके प्रमोटर स्वराज सिंह यादव और अन्य संबंधित व्यक्तियों पर घर खरीदारों तथा निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए गए थे। आरोप है कि कंपनी ने रियल एस्टेट परियोजनाओं के नाम पर लोगों से धनराशि प्राप्त की, लेकिन कई मामलों में परियोजनाओं और आवंटन से संबंधित शर्तों का पालन नहीं किया गया।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय पहले भी कार्रवाई कर चुका है। नवंबर 2025 में ईडी ने दिल्ली-एनसीआर समेत नौ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान जांच एजेंसी ने लगभग 86 लाख रुपये नकद, महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद करने की जानकारी दी थी। तलाशी अभियान के बाद कंपनी के प्रमोटर और प्रबंध निदेशक स्वराज सिंह यादव को गिरफ्तार किया गया था।
ईडी की जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, कंपनी ने प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी किफायती आवास परियोजनाओं में घर खरीदारों से बड़ी रकम जुटाई थी। आरोप है कि कुछ मामलों में खरीदारों के फ्लैट आवंटन को अलग-अलग कारणों से रद्द किया गया और बाद में उन्हीं इकाइयों को अधिक कीमत पर दूसरे लोगों को बेच दिया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, ऐसे मामलों में मूल खरीदारों को उनकी जमा राशि वापस नहीं किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। ईडी का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए एक ही आवासीय इकाई से दोबारा धन जुटाया गया।
ईडी ने अपनी पूर्व जांच में यह भी आरोप लगाया था कि घर खरीदारों से प्राप्त धनराशि को निर्धारित परियोजनाओं में इस्तेमाल करने के बजाय दूसरी संस्थाओं और संबंधित कंपनियों के खातों में स्थानांतरित किया गया। इस धन के कथित दुरुपयोग और उसके अलग-अलग माध्यमों से हस्तांतरण की जांच की जा रही है।
इसके अलावा जांच एजेंसी ने कुछ संपत्तियों की बिक्री और धन के हस्तांतरण से संबंधित लेनदेन को भी जांच के दायरे में रखा है। ईडी का आरोप है कि कंपनी और उससे जुड़े व्यक्तियों द्वारा कई संपत्तियों को बेचकर धन को दूसरे रूप में परिवर्तित करने का प्रयास किया गया था।
जनवरी 2026 में भी प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में 51.57 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया था। इनमें गुरुग्राम, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित एक विला, होटल एवं रिसॉर्ट, कार्यालय परिसर तथा जमीन के भूखंड शामिल थे। बैंक खातों में जमा रकम और जब्त नकदी भी उस कार्रवाई का हिस्सा थी।
ईडी ने इस मामले में स्वराज सिंह यादव और अन्य संबंधित संस्थाओं के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की थी। जांच एजेंसी का कहना है कि घर खरीदारों से प्राप्त धनराशि के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है।
गौरतलब है कि संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने का अर्थ अंतिम रूप से जब्त कर लेना नहीं है। पीएमएलए के तहत इस कार्रवाई की आगे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया होती है। आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी और संपत्तियों के अंतिम निस्तारण का निर्धारण सक्षम प्राधिकरण तथा अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगा।
प्रवर्तन निदेशालय की ताजा कार्रवाई के बाद ओशन सेवन बिल्डटेक मामले में अटैच संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 188 करोड़ रुपये हो गया है। जांच एजेंसी अब मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संबंधित व्यक्तियों और अन्य संभावित संपत्तियों की जांच कर रही है।
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