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राहुल गांधी के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात मांग पर ECI ने उठाए सवाल

Ratna Netam
6 Oct 2026 9:55 PM IST
राहुल गांधी के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात मांग पर ECI ने उठाए सवाल
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नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने मंगलवार को विपक्षी INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन और चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया। आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल या उसके अधिकृत प्रतिनिधि की ओर से चुनाव आयोग से औपचारिक बैठक का समय नहीं मांगा गया था। आयोग का यह बयान उस समय आया, जब राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसद निर्वाचन सदन की ओर मार्च कर रहे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ विरोध जता रहे थे।चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि उसे शाम करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस की ओर से जानकारी मिली कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में लगभग 240 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहता है। आयोग को यह भी बताया गया कि प्रतिनिधिमंडल संसद भवन एनेक्सी में बैठक करना और वहीं अपना ज्ञापन सौंपना चाहता है।
आयोग ने इस मांग को अपनी स्थापित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के संदर्भ में “असामान्य” बताया। चुनाव आयोग के मुताबिक आम तौर पर राजनीतिक दल या संयुक्त प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलने के लिए अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से पहले से समय मांगते हैं। बैठकें आयोग के निर्धारित परिसर और स्थापित प्रक्रिया के अनुसार आयोजित की जाती हैं।ECI का कहना है कि इस मामले में शाम 4 बजे तक न तो किसी राजनीतिक दल की ओर से और न ही उसके अधिकृत प्रतिनिधि की ओर से औपचारिक बैठक का अनुरोध प्राप्त हुआ था। आयोग ने कहा कि पहली जानकारी उसे दिल्ली पुलिस के जरिए मिली कि बड़ी संख्या में विपक्षी सांसद मुलाकात करना चाहते हैं।
आयोग के मुताबिक 240 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ संसद भवन एनेक्सी में बैठक करने की मांग भी सामान्य प्रक्रिया से अलग थी। चुनाव आयोग ने कहा कि वह राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात के लिए एक निर्धारित व्यवस्था का पालन करता है और इस तरह अचानक बड़ी संख्या में सांसदों के साथ किसी दूसरे स्थान पर बैठक करना तय प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं है।यह घटनाक्रम मंगलवार को उस समय सामने आया जब INDIA गठबंधन के सांसद और नेता संसद से निर्वाचन सदन की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में गंभीर सवाल हैं और चुनाव आयोग को इन पर जवाब देना चाहिए।
दिल्ली पुलिस ने निर्वाचन सदन की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की थी। जब विपक्षी सांसद आगे बढ़ने लगे तो उन्हें रोक दिया गया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन के पास धरने पर बैठ गए।विपक्षी नेताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें चुनाव आयोग से मिलने नहीं दिया जा रहा है। राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने कहा कि वे चुनाव आयुक्तों से सीधे मिलकर अपनी शिकायतें और मांगें रखना चाहते हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि औपचारिक बैठक के लिए तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।
आयोग ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि ज्ञापन स्वीकार करने की व्यवस्था की जा सकती थी। समकालीन रिपोर्टों के अनुसार आयोग ने अपने वरिष्ठ अधिकारी को ज्ञापन लेने के लिए भेजने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन विपक्षी प्रतिनिधियों की मांग चुनाव आयुक्तों से सीधे मुलाकात की थी।यह विवाद चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है। INDIA गठबंधन के कई नेता चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची संशोधन और SIR प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
चुनाव आयोग दूसरी ओर यह कहता रहा है कि मतदाता सूची की समीक्षा और संशोधन निर्धारित नियमों तथा चुनावी प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं। आयोग का कहना है कि राजनीतिक दलों को भी अपनी शिकायतें औपचारिक और निर्धारित प्रक्रिया के जरिए प्रस्तुत करनी चाहिए।मंगलवार के घटनाक्रम में विवाद का मुख्य बिंदु यही रहा कि क्या विपक्ष ने चुनाव आयोग से मिलने के लिए पहले से समय मांगा था। आयोग ने इस पर स्पष्ट रूप से कहा कि शाम 4 बजे तक ऐसी कोई औपचारिक मांग उसके पास नहीं पहुंची थी।
वहीं विपक्षी नेताओं का कहना था कि उनका प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग तक पहुंचकर अपनी बात रखना चाहता था, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग के कारण उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया। यही कारण रहा कि विरोध मार्च बाद में धरने में बदल गया।चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल या संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात के लिए अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से पूर्व निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। आयोग ने इस व्यवस्था को संस्थागत संवाद और सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए जरूरी बताया।
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच संवाद की प्रक्रिया को बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर विपक्ष आयोग से सीधे जवाब मांग रहा है, तो दूसरी ओर आयोग औपचारिक प्रोटोकॉल और निर्धारित प्रक्रिया पर जोर दे रहा है।फिलहाल मंगलवार के विरोध के बाद राजनीतिक टकराव थमता नहीं दिख रहा है। INDIA गठबंधन चुनाव आयोग और SIR से जुड़े सवालों को लेकर अपना विरोध जारी रखने के संकेत दे चुका है, जबकि आयोग ने साफ कर दिया है कि किसी भी औपचारिक बैठक के लिए तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होगा।
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