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भूकंप से कांपी धरती, दिल्ली-NCR तक महसूस हुए झटके

Kiran
7 Oct 2026 9:00 AM IST
भूकंप से कांपी धरती, दिल्ली-NCR तक महसूस हुए झटके
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नई दिल्ली उत्तर भारत अक्टूबर 2026 की रात अचानक आए भूकंप के झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। उत्तराखंड के सिक्किम जिले में आये भूकंप का असर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भी महसूस किया गया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की गति 4.9 मापी गई। रात के समय अचानक धरती हिलने से कई लोग डर गए और सुरक्षित स्थान की ओर चले गए। दिल्ली, सामने और ग़ाज़ियाबाद सहित कई देशों में भूकंप के झटके महसूस होने की खबर है।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप 6 अक्टूबर की रात 10 भूकंप 23 मिनट और 13 सेकंड पर आया। इसका केंद्र उत्तराखंड के खिमी जिले में स्थित था। भूकंप की गहराई जमीन से लगभग 13 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई है। सेंटर ने भूकंप के लक्षण 4.9 होने की पुष्टि की है। भूकंप का केंद्र जोशीमठ से लगभग 50 किलोमीटर दक्षिण में स्थित था
भूकंप के झटके केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहे, बल्कि दिल्ली-मौजूदा के कई इलाक़ों में भी महसूस किये गये। अचानक आये के कारण लोगों में चिंता बढ़ गयी। कुछ जगहों पर लोग सामान के तौर पर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। भूकंप के बाद लोगों के बीच इसके हिस्सों और केंद्र को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
दिल्ली के साथ-साथ गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में भी धरती हिलने का हुआ एहसास। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में भूकंप के झटकों की जानकारी सामने आई। गमी के अलावा बागेश्वर, प्लास्टर, बांस और बांस सहित कई जगहों पर भी ठंडक महसूस होने की खबर है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में भी भूकंपीय घटनाओं का असर महसूस किया गया।
राहत की बात यह चल रही है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में भूकंप के कारण कोई बड़ा नुकसान या जनहानी की सूचना सामने नहीं आई है। हालाँकि, पर्वतीय क्षेत्रों में भूकंप आने की विशेष आवश्यकता है। ऐसे पूर्वी तट पर ढलान वाले ढलानों, फ़्लोरिडा स्थापत्य कला और वास्तुकला वाले द्वीपों पर जोखिम अधिक हो सकता है। किसी भी तरह से नुकसान की सही स्थिति, स्थानीय प्रशासन की जांच और आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट होता है
उत्तराखंड का सिक्किम जिला हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जहां भूकंपीय उपकरण भूगर्भीय रेनॉल्ड्स से जुड़े हुए हैं। हिमालय का निर्माण भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक सोलर्स की एकता गति के कारण हुआ है। इन तर्कों के बीच लगातार दबाव बनी रहती है। जब आश्रम में जमा ऊर्जा अचानक मुक्त होती है, तब भूकंप पैदा होता है।
विशेषज्ञ के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में भूकंप आना कोई असामान्य घटना नहीं है। हालाँकि, भूकंप कब और किन खाद्य पदार्थों का आगमन, इसकी भविष्यवाणी वर्तमान वैज्ञानिक तकनीक से संभव नहीं है। भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में मजबूत निर्माण, आपदा प्रबंधन और लोगों के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है।
दिल्ली- भूकंप की दृष्टि से भी भूकंप प्रभावित क्षेत्र है। राजधानी और आसपास की बड़ी संख्या में बहुसंख्यक जिला, आवासीय कॉलोनियां और व्यावसायिक समुदाय मौजूद हैं। ऐसी स्थिति में भूकंप के दौरान सुरक्षित व्यवहार बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। विशेष रूप से पुराने और अधूरे अल्पसंख्यकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।
भूकंप के झटके और लोगों के बीच सीधा संबंध हमेशा वैसा ही रहता है जैसा नहीं होता। नुकसान इस बात पर भी जोर दिया गया है कि भूकंप का केंद्र बिंदु गहराई पर था, प्रभावित क्षेत्र की मिट्टी और चट्टानों की स्थिति कैसी थी और वहां मौजूद स्थिरता कितनी मजबूत थी। कई बार मध्यम दर्द वाले भूकंप से भी बाढ़ वाले समुद्र में नुकसान हो सकता है। भूकंप आने की स्थिति में लोगों को डरने की बजाय सावधानी बरतनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति भवन के अंदर है, तो उसे मजबूत महल के नीचे अपने सिर और गर्दन को सुरक्षित रखना चाहिए। झटके के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। प्रोडक्शन, कांच और भारी सामान से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।
यदि कोई व्यक्तिगत खुला स्थान मौजूद है, तो उसे बिजली के खंभों, दुकानों और प्रतिष्ठानों से दूर रहना चाहिए। वाहन चलाने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर गाड़ी रोककर का इंतज़ाम तब तक के लिए ख़त्म होना चाहिए। भूकंप के बाद इमारत में प्रवेश करने से बचना चाहिए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र यूनेस्को में होने वाली भूकंपीय संरचनाओं की निगरानी करता है। केंद्र भूकंप के लक्षण, समय, गहराई और स्थान से संबंधित जानकारी जारी करता है। इससे संबंधित दस्तावेज और नागरिकों को भूकंप की वास्तविक स्थिति के संकेत में सहायता मिलती है।
मंगलवार की रात सुरक्षा को लेकर आए भूकंप ने एक बार फिर उत्तर भारत में भूकंप से जुड़ी इमारतों और घरों का महत्व सामने ला दिया है। विशेष रूप से- दिल्ली के कृषकों जैसे घुटने की आबादी वाले क्षेत्र में आपदा के समय की सही जानकारी और एसआईटी अत्यंत आवश्यक है। लोगों को अफ़वाहों से बचने और केवल विश्वसनीय आधिकारिक आज़ाद करने की सलाह दी जाती है।
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