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ऑनलाइन डिग्री पर DU का नया प्लान, छात्रों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) दूरस्थ और ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक रूप देने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालय अपने लंबे समय से संचालित स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) को अब सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन (CDOE) में बदलने जा रहा है। इस संबंध में 24 जुलाई को होने वाली अकादमिक काउंसिल (AC) की बैठक में महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा जाएगा। माना जा रहा है कि यह बदलाव केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऑनलाइन और डिस्टेंस एजुकेशन के पूरे ढांचे को नए तरीके से तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
डीयू प्रशासन के अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों की बढ़ती मांग और नई शिक्षा नीति के लक्ष्यों को देखते हुए दूरस्थ शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाना जरूरी हो गया है। CDOE बनने के बाद ऑनलाइन डिग्री, डिजिटल पाठ्यक्रम और दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों को यूजीसी के नए नियमों के अनुरूप संचालित किया जा सकेगा।
प्रस्ताव के तहत स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग का नाम बदलकर सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन किया जाएगा। इसके साथ ही एसओएल के प्रमुख का पदनाम भी बदला जाएगा। वर्तमान प्रिंसिपल का पदनाम बदलकर डायरेक्टर किया जाएगा। नए केंद्र का संचालन एक पूर्णकालिक निदेशक के जिम्मे होगा, जो कम से कम एसोसिएट प्रोफेसर स्तर का अधिकारी होगा।
यह बदलाव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग एवं ऑनलाइन प्रोग्राम्स रेगुलेशन 2022 के तहत किया जा रहा है। यूजीसी के नियमों के अनुसार, ओपन यूनिवर्सिटी को छोड़कर सभी विश्वविद्यालयों में दूरस्थ और ऑनलाइन शिक्षा संचालित करने के लिए सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन की स्थापना करना आवश्यक है।
डीयू का कहना है कि एसओएल पिछले कई वर्षों से हजारों छात्रों को दूरस्थ शिक्षा उपलब्ध करा रहा है। लेकिन अब शिक्षा के बदलते स्वरूप, ऑनलाइन लर्निंग की बढ़ती मांग और तकनीकी विकास को देखते हुए इसकी संरचना में बदलाव जरूरी हो गया है। CDOE बनने के बाद पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता, ऑनलाइन क्लास, परीक्षा व्यवस्था, छात्रों की सहायता प्रणाली और शैक्षणिक निगरानी को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्रों को अधिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। ऑनलाइन कोर्स, ई-कंटेंट, वर्चुअल क्लास और आधुनिक शिक्षण तकनीकों के इस्तेमाल से दूरस्थ शिक्षा को और मजबूत किया जाएगा। इससे उन छात्रों को फायदा मिलेगा जो नियमित कॉलेज में पढ़ाई नहीं कर पाते और ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड से अपनी डिग्री पूरी करना चाहते हैं।
एसओएल की गवर्निंग बॉडी ने भी 15 जुलाई को हुई बैठक में इस प्रस्ताव की सिफारिश की थी। अब अंतिम मंजूरी के लिए इसे अकादमिक काउंसिल के सामने रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद डीयू की दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था नए स्वरूप में काम करेगी।
अकादमिक काउंसिल की बैठक में इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे जाएंगे। इनमें तीन स्नातक खेल छात्रों के लिए स्वर्गीय अरुण जेटली छात्रवृत्ति शुरू करने, यूजीसीएफ-2022 के तहत चौथे वर्ष के रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप ट्रैक में क्रेडिट बढ़ाने और लेडी श्रीराम कॉलेज में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (BA-BEd) शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है।
डीयू का यह कदम उच्च शिक्षा में डिजिटल बदलाव की दिशा में अहम माना जा रहा है। CDOE बनने के बाद विश्वविद्यालय की ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत पहचान मिलने की उम्मीद है।





