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साइबर ठगी रोकने को DU-I4C समझौता

Saba Naaz
13 July 2026 6:40 PM IST
साइबर ठगी रोकने को DU-I4C समझौता
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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, डिजिटल ठगी की घटनाओं को रोकना, अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना तथा छात्रों को जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने के लिए तैयार करना है।

एमओयू पर डीयू की ओर से कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता और आई4सी की ओर से निदेशक निशांत कुमार ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और साइबर सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

डॉ. विकास गुप्ता ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं और कमजोर वर्ग के छात्रों की साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के संज्ञान में समय-समय पर डिजिटल बुलिंग, ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, फिशिंग, सोशल मीडिया धोखाधड़ी और साइबर फ्रॉड के कई मामले आते रहते हैं। कई बार छोटी-सी लापरवाही भी छात्रों के लिए आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव का कारण बन जाती है। ऐसे मामलों को रोकने और विद्यार्थियों को पहले से जागरूक करने के उद्देश्य से यह साझेदारी की गई है।

आई4सी के निदेशक निशांत कुमार ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ यह साझेदारी सुरक्षित, जागरूक और डिजिटल रूप से सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे युवाओं में जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता की भावना विकसित होगी और वे साइबर खतरों की पहचान कर उनसे बचाव के उपाय सीख सकेंगे।

दिल्ली विश्वविद्यालय कंप्यूटर सेंटर के निदेशक प्रो. संजीव सिंह ने बताया कि इस सहयोग के तहत विश्वविद्यालय में नियमित रूप से साइबर जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं, सेमिनार, विशेषज्ञ व्याख्यान, हैकाथॉन, छात्र प्रतियोगिताएं, इंटर्नशिप, साइबर वालंटियर कार्यक्रम और अनुभवात्मक शिक्षण जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर अपराध के बदलते तरीकों, डिजिटल सुरक्षा के उपायों और ऑनलाइन जोखिमों से बचने के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि इस पहल के अंतर्गत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा अधिसूचित साइबर सुरक्षा एवं साइबर जागरूकता पाठ्यक्रमों के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही ज्ञान-विनिमय, नवाचार, संयुक्त अनुसंधान और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों संस्थान मिलकर कार्य करेंगे। इससे विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में करियर और शोध के नए अवसर भी मिल सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेनदेन, ऑनलाइन शिक्षा, सोशल मीडिया और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि छात्रों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक बनाना भी उनकी जिम्मेदारी है। डीयू और आई4सी के बीच हुआ यह समझौता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे विश्वविद्यालय परिसर में साइबर सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने और विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

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