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नाला बना मौत का जाल, प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

Saba Naaz
25 July 2026 9:48 PM IST
नाला बना मौत का जाल, प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल
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दक्षिणी दिल्ली: नांगल देवत गांव में डीडीए के खुले नाले ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। यहां सड़क किनारे बने गहरे और खुले नाले में कार गिरने से भारतीय सेना के अधिकारी के बेटे यशवेंद्र की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद अब डीडीए और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय आरडब्ल्यूए का दावा है कि इस खतरनाक नाले को लेकर कई बार शिकायतें की गई थीं, लेकिन संबंधित विभागों ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

जानकारी के अनुसार, नांगल देवत गांव में डीडीए का यह नाला लंबे समय से लोगों के लिए खतरा बना हुआ था। गांव वालों ने बताया कि नाले के पास करीब 130 डिग्री का बेहद तीखा मोड़ है, जहां वाहन चालकों को परेशानी होती है। इस मोड़ पर सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। नाले के किनारे सुरक्षा दीवार नहीं होने के कारण हादसे का खतरा लगातार बना हुआ था। ग्रामीणों और आरडब्ल्यूए की ओर से कई बार डीडीए को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

शुक्रवार को इसी लापरवाही का खामियाजा सैन्य अधिकारी के बेटे यशवेंद्र को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। पुलिस के अनुसार, हादसे के समय यशवेंद्र अपनी एक महिला मित्र के साथ नांगल देवत मार्ग से अब्दुल गफ्फार खां मार्ग की ओर जा रहे थे। उनके पीछे एक अन्य दोस्त भी अपनी कार से चल रहा था। लाल बत्ती से करीब 200 मीटर पहले स्थित तीखे मोड़ पर बारिश के कारण सड़क गीली थी। इसी दौरान कार अनियंत्रित हो गई और पहले पेड़ से टकराई। इसके बाद सड़क किनारे बनी करीब एक फीट ऊंची दीवार को तोड़ते हुए कार पलटकर खुले नाले में जा गिरी।

हादसे के बाद कार में फंसे यशवेंद्र को बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन समय पर सफलता नहीं मिल सकी। पुलिस के मुताबिक, कार चला रहे यशवेंद्र की सीट बेल्ट नहीं खुल पाई और पानी में सिर के बल फंसने के कारण दम घुटने से उनकी मौत हो गई। वहीं, कार में मौजूद युवती किसी तरह खिड़की से बाहर निकलने में सफल रही। कुछ ही देर में पीछे आ रहा दोस्त भी मौके पर पहुंच गया और दोनों ने यशवेंद्र को बचाने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।

सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और सभी को इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने यशवेंद्र को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। शनिवार को सफदरजंग अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद परिवार ने दिल्ली कैंट स्थित बरार स्क्वायर में यशवेंद्र का अंतिम संस्कार किया।

यशवेंद्र का परिवार मूल रूप से कोलकाता का रहने वाला है। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी हैं और वर्तमान में दिल्ली कैंट में तैनात हैं। परिवार के अनुसार, यशवेंद्र अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे थे और कुछ दिनों के लिए दोस्तों से मिलने व घूमने दिल्ली आए थे। लेकिन एक छोटी सी लापरवाही ने उनकी जिंदगी खत्म कर दी।

हादसे के बाद डीडीए की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि डीडीए अधिकारियों का कहना है कि नाले के किनारे टो वॉल मौजूद थी और हादसे वाले मोड़ पर स्पीड ब्रेकर लगाने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन ट्रैफिक विभाग से इसकी अनुमति नहीं मिली थी। वहीं ट्रैफिक विभाग ने मामले की जानकारी जुटाने की बात कही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता और नाले के पास सुरक्षा इंतजाम किए जाते तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। अब पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों की पड़ताल की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी एजेंसियों की लापरवाही और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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