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सिरमौर के लोक कलाकार डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

नई दिल्ली/सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की समृद्ध लोक संस्कृति को देश और दुनिया तक पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक कलाकार डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। लोकनृत्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान, लोक परंपराओं के संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित भव्य समारोह में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न कला क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को लोकनृत्य क्षेत्र में उनकी वर्षों की साधना और योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
नई दिल्ली के ज्ञान भवन में आयोजित अलंकरण समारोह का शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दीप प्रज्वलित कर किया। समारोह में देशभर से कला, संस्कृति और साहित्य क्षेत्र से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं।
कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल, संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को यह सम्मान सिरमौर जिले की विलुप्तप्राय लोक सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए दिया गया है। उन्होंने वर्षों से हिमाचल की लोक संस्कृति, विशेषकर सिरमौर क्षेत्र की पारंपरिक लोक कलाओं और नृत्य विधाओं को देश-विदेश के मंचों तक पहुंचाने का कार्य किया है।
सिरमौर की लोक संस्कृति अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यहां के पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक परंपराएं सदियों पुराने इतिहास को दर्शाती हैं। बदलते समय में कई लोक कलाएं धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रही थीं। ऐसे समय में डॉ. हाब्बी ने इन परंपराओं को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
डॉ. जोगेंद्र हाब्बी ने न केवल लोकनृत्य का प्रदर्शन किया, बल्कि इसके संरक्षण के लिए शोध, प्रशिक्षण और जागरूकता के क्षेत्र में भी योगदान दिया। उनके प्रयासों से सिरमौर की कई लोक परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
उनकी इस उपलब्धि से सिरमौर जिले में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों, कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे जिले और हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है।
लोगों का कहना है कि डॉ. हाब्बी ने अपनी मेहनत और समर्पण से सिरमौर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया है। उनका सम्मान उन सभी लोक कलाकारों के लिए प्रेरणा है, जो अपनी परंपराओं और संस्कृति को बचाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार देश के सबसे प्रतिष्ठित कला सम्मानों में से एक माना जाता है। यह पुरस्कार संगीत, नृत्य, नाटक और अन्य प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले कलाकारों को प्रदान किया जाता है।
डॉ. जोगेंद्र हाब्बी ने यह सम्मान प्राप्त कर हिमाचल प्रदेश की लोक कला को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी उपलब्धि से प्रदेश के कलाकारों को भी नई ऊर्जा और प्रोत्साहन मिलेगा।
सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोक कलाओं के संरक्षण के लिए ऐसे कलाकारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, जो अपनी जड़ों से जुड़े रहकर परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं। डॉ. हाब्बी इसी दिशा में लंबे समय से कार्य कर रहे हैं।
उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि सिरमौर की सांस्कृतिक धरोहर का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। राष्ट्रपति के हाथों मिला यह पुरस्कार उनके वर्षों के संघर्ष, कला के प्रति समर्पण और लोक संस्कृति के संरक्षण के प्रयासों की पहचान है।





