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हार के बावजूद कायम रहा दबदबा अरुण जेटली की राजनीति की अनोखी कहानी
Ratna Netam
23 Aug 2026 7:16 PM IST

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दिल्ली : भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे नेता भी हुए हैं, जिन्होंने चुनावी जीत के बिना भी देश की सत्ता और नीति निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ऐसे ही राजनेताओं में शामिल रहे। उन्होंने कभी लोकसभा का आम चुनाव नहीं जीता, लेकिन केंद्र सरकार में वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी संभाली और देश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
अरुण जेटली को एक कुशल रणनीतिकार, प्रभावी वक्ता और संविधान व कानून के जानकार नेता के रूप में जाना जाता था। उन्होंने संसद के अंदर और बाहर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी और सरकार का पक्ष मजबूती से रखा।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को नई दिल्ली में हुआ था। उनके पिता महाराज किशन जेटली एक वकील थे। अरुण जेटली ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और यहीं से उनका जुड़ाव छात्र राजनीति से हुआ।
वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष भी बने। आपातकाल के दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ आंदोलन में भाग लिया और करीब 19 महीने तक जेल में रहे।
यही दौर उनके राजनीतिक जीवन की नींव बना। आपातकाल के विरोध ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और बाद में वह भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।
कानून के क्षेत्र में बनाई पहचान
राजनीति में सक्रिय होने के साथ-साथ अरुण जेटली एक सफल वकील भी थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कई उच्च न्यायालयों में वकालत की।
कानूनी मामलों की गहरी समझ के कारण पार्टी में उनका महत्व लगातार बढ़ता गया। वह भाजपा के प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों में गिने जाने लगे और कई संवेदनशील मामलों में पार्टी का पक्ष रखा।
उनकी भाषण शैली, तर्क क्षमता और विषयों की समझ ने उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाई।
कभी नहीं जीता लोकसभा चुनाव
अरुण जेटली का राजनीतिक सफर काफी प्रभावशाली रहा, लेकिन एक खास बात यह रही कि वह कभी लोकसभा चुनाव जीत नहीं पाए।
उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई।
राज्यसभा के रास्ते वह संसद पहुंचे और केंद्र सरकार के सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में शामिल रहे।
मोदी सरकार में निभाई बड़ी जिम्मेदारी
2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद अरुण जेटली को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा उन्होंने कुछ समय के लिए रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला।
वित्त मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में कई बड़े आर्थिक फैसले लिए गए। इनमें वस्तु एवं सेवा कर यानी GST लागू करना, नोटबंदी के बाद आर्थिक प्रबंधन और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार जैसे फैसले शामिल रहे।
GST को देश की सबसे बड़ी कर सुधार व्यवस्था में से एक माना जाता है। इसके लागू होने में अरुण जेटली की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।
पार्टी के संकटमोचक नेता
अरुण जेटली को भाजपा का संकटमोचक भी कहा जाता था। जब भी पार्टी को किसी राजनीतिक या कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ता था, तो उनकी सलाह को काफी महत्व दिया जाता था।
वह विपक्ष के हमलों का जवाब तथ्यों और तर्कों के साथ देने के लिए जाने जाते थे। संसद में उनकी बहस करने की क्षमता की कई राजनीतिक विरोधी भी तारीफ करते थे।
संगठन में भी निभाई अहम भूमिका
अरुण जेटली ने भाजपा संगठन में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता जैसे पदों पर रहे।
उन्होंने पार्टी की चुनावी रणनीति बनाने में भी योगदान दिया। भाजपा के कई बड़े चुनाव अभियानों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही।
स्वास्थ्य और अंतिम समय
अरुण जेटली लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने 2018 में वित्त मंत्रालय से स्वास्थ्य कारणों के चलते दूरी बनाई। इसके बाद उनका इलाज चलता रहा।
24 अगस्त 2019 को नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय राजनीति में एक अनुभवी रणनीतिकार और कुशल वक्ता का दौर समाप्त हो गया।
विरासत और योगदान
अरुण जेटली का राजनीतिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि राजनीति में केवल चुनाव जीतना ही प्रभाव का आधार नहीं होता। ज्ञान, अनुभव, संगठन क्षमता और नीति निर्माण में योगदान भी किसी नेता को महत्वपूर्ण बना सकते हैं।
उन्होंने बिना लोकसभा चुनाव जीते देश के सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय राजनीति में अपनी अलग छाप छोड़ी।
कानून, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक रणनीति के क्षेत्र में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा। अरुण जेटली उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने सत्ता में रहते हुए अपनी कार्यशैली और विचारों से एक अलग पहचान बनाई।
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