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नीट पीजी कटऑफ के विरोध में डॉक्टर एसोसिएशन का स्वास्थ्य मंत्री को पत्र, फैसला वापस लेने की मांग
SHIDDHANT
14 Jan 2026 11:21 PM IST

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Delhi दिल्ली। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की तरफ से स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री को पत्र लिखकर कहा गया है कि वे राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के हाल ही में नीट पीजी 2025 के लिए योग्यतम कटऑफ स्कोर में अचानक और बहुत बड़ी कटौती के फैसले से बहुत चिंतित हैं। पत्र में कहा गया है कि यह कदम मेरिट (योग्यता) पर आधारित चयन प्रक्रिया को कमजोर करता है। लाखों मेडिकल उम्मीदवारों की मेहनत और तैयारी को बेअसर करता है और आम जनता की नजर में मेडिकल पेशे की विश्वसनीयता को खतरे में डालता है। नीट पीजी का मकसद ही यह सुनिश्चित करना है कि योग्य उम्मीदवार ही विशेषज्ञ प्रशिक्षण में प्रवेश पाएं।
फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अपने पत्र में लिखा कि पिछले उच्च कटऑफ को पाने के लिए उम्मीदवारों ने कई साल मेहनत की, लेकिन एनबीई ने बिना किसी ठोस कारण या सलाह के इसे अचानक कम कर दिया। इससे मेरिट की भावना कमजोर होगी, टॉपर उम्मीदवारों का मनोबल गिरेगा और कम स्कोर वाले उम्मीदवारों के कारण मरीजों की देखभाल पर असर पड़ सकता है। पत्र में आगे लिखा गया है कि यह फैसला जनता के बीच डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसा कम कर देगा। साथ ही, यह निजी मेडिकल कॉलेजों को फायदा पहुंचाता है क्योंकि कम स्कोर वाले उम्मीदवारों को उच्च फीस पर दाखिला दिया जाएगा। इससे संस्थानों के लाभ को छात्रों के हित पर प्राथमिकता मिलती है। पहले से ही कुछ विवादों के कारण भरोसा कमजोर है और कटऑफ कम होने से डॉक्टरों को उच्च कौशल वाले विशेषज्ञ के रूप में देखने की धारणा पर भी असर पड़ेगा। मरीजों को योग्य विशेषज्ञ मिलना चाहिए, न कि कमजोर मानकों वाले।
पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि सोशल मीडिया पर इसका विरोध बढ़ रहा है, जिससे इस पेशे के प्रति व्यापक संदेह और असंतोष फैल सकता है। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन हमेशा से यह मानती है कि पोस्टग्रेजुएट प्रशिक्षण प्रणाली को मजबूत करना चाहिए, कमजोर नहीं। वे आपसे तुरंत हस्तक्षेप की अपील करते हैं। पत्र में मांग की गई है कि कटऑफ फैसले को रद्द किया जाए और पूर्व निर्धारित योग्यता मानदंड को फिर से लागू किया जाए। एनएमसी, एनबीई और रेजिडेंट डॉक्टरों के प्रतिनिधियों की उच्च स्तरीय समिति बनाकर कटऑफ नीति को पारदर्शी रूप से समीक्षा की जाए। भविष्य में इस तरह के एकतरफा फैसलों को रोकने के लिए सभी हितधारकों की राय शामिल की जाए।
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