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DELHI दिल्ली: डीएमके सांसद एमके कनिमोझी ने भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के हालिया बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में एक कार्यक्रम के दौरान स्कूल के बच्चों से सवाल किया कि चंद्रमा पर सबसे पहले कदम किसने रखा और फिर दावा किया कि यह नील आर्मस्ट्रांग नहीं, बल्कि भगवान हनुमान थे। कनिमोझी ने इस बयान पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, "एक सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री द्वारा स्कूली बच्चों से यह पूछना कि चांद पर सबसे पहले किसने कदम रखा, और जोर देकर कहना कि वह हनुमान थे, बेहद परेशान करने वाला है।"
उन्होंने आगे कहा, "विज्ञान कोई मिथक नहीं है। कक्षाओं में युवाओं को गुमराह करना ज्ञान, तर्क और हमारे संविधान में निहित वैज्ञानिक सोच का अपमान है।" कनिमोझी ने जोर देकर कहा कि भारत का भविष्य जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच को पोषित करने में निहित है, न कि तथ्यों को मिथकों से भ्रमित करने में। कनिमोझी के इस बयान ने सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दिया। कई लोग उनके समर्थन में हैं और कहते हैं कि शिक्षा को तर्क और वैज्ञानिक आधार पर होना चाहिए, जबकि कुछ लोग इसे संस्कृति बनाम विज्ञान के दृष्टिकोण से देख रहे हैं।
अनुराग ठाकुर ने छात्रों को यह भी सुझाव दिया कि वे भारत की परंपराओं से जुड़ने के लिए पाठ्यपुस्तकों से आगे देखें। उनके इस बयान पर विवाद फैल गया क्योंकि इसमें मिथक और विज्ञान को मिलाकर प्रस्तुत किया गया। इस घटना के बाद शिक्षा और वैज्ञानिक सोच के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सटीक जानकारी का विकास प्राथमिकता होनी चाहिए। कनिमोझी का यह बयान दर्शाता है कि राजनीतिक हस्तियों द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में दिए जाने वाले संदेशों पर निगरानी और जागरूकता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बच्चों को तथ्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अवगत कराना जरूरी है, ताकि वे सही ज्ञान और तर्कसंगत सोच विकसित कर सकें।





