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डीके शिवकुमार का बड़ा आरोप, वोटरों को बनाया जा रहा निशाना

नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल सेक्युलर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार, 8 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से वैध मतदाताओं के नाम हटाने की बड़ी साजिश चल रही है। उनके अनुसार, विशेष रूप से अल्पसंख्यक, दलित, पिछड़े वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। शिवकुमार ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और इसकी रक्षा करना प्रत्येक राजनीतिक दल तथा विपक्षी नेता की जिम्मेदारी है। इस दौरान उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह बिना किसी व्यक्तिगत लाभ के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा ने मतदाता सूची में राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगाए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से आवेदन किए जा रहे हैं।
शिवकुमार का दावा है कि यह मामला केवल कर्नाटक के किसी एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर मतदाता सूची को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान करने का अधिकार है। किसी भी व्यक्ति को गलत तरीके से इस अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग दोहराई।
दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम हटाने का आरोप
डीके शिवकुमार ने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने गरीब और बेघर नागरिकों के नाम हटाने के प्रयासों का भी आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन दिए गए हैं, उनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो अपने पते पर रहते हैं और मतदान के पात्र हैं।
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया कुछ राजनीतिक दलों को चुनावी लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है।
हालांकि, किन समुदायों के कितने पात्र मतदाताओं के नाम वास्तव में गलत तरीके से हटाए गए हैं, इसका स्वतंत्र रूप से सत्यापित विवरण उपलब्ध नहीं है।
फॉर्म-7 के दुरुपयोग का उठाया मामला
मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम को हटाने पर आपत्ति जताने या नियमानुसार नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है।
शिवकुमार का आरोप है कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग करके बड़ी संख्या में आवेदन जमा किए जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर मतदाताओं के नाम, पते और मतदाता पहचान पत्र संख्या पहले से दर्ज करके फॉर्म तैयार किए गए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इन आवेदन पत्रों को स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से जमा कराया गया।
उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों की विस्तृत जांच होना आवश्यक है।
45 लाख से अधिक मतदाताओं का मामला उठाया
डीके शिवकुमार ने इससे पहले भी कर्नाटक में लाखों मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश का आरोप लगाया था।
उन्होंने दावा किया था कि 45 लाख से अधिक मतदाताओं से संबंधित रिकॉर्ड में गड़बड़ियों की आशंका सामने आई है।
शिवकुमार ने विजयपुरा, भालकी, बेलगावी, मैसूर, मुदिगेरे और बेंगलुरु सहित कई क्षेत्रों का उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि विजयपुरा में ही हजारों फॉर्म-7 आवेदन जमा किए गए।
हालांकि, बड़ी संख्या में नाम हटाने के आवेदन जमा होना और वास्तव में मतदाता सूची से नाम हटा दिया जाना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
किसी नाम को हटाने का अंतिम निर्णय निर्वाचन अधिकारियों को निर्धारित जांच प्रक्रिया के अनुसार करना होता है।
राहुल गांधी की जमकर की तारीफ
नई दिल्ली की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं।
शिवकुमार के अनुसार, राहुल गांधी यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत या साझा राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के प्रत्येक नेता की जिम्मेदारी है कि वह पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाए।
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की सक्रियता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मतदाता सूची की पारदर्शिता बनाए रखना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
चुनाव आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग
डीके शिवकुमार ने चुनाव आयोग से कथित फर्जी आवेदनों की जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि जांच केवल आवेदन जमा करने वाले छोटे कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
यदि किसी संगठित योजना के तहत मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया गया है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इतने बड़े स्तर पर आवेदन जमा किए जाने की प्रक्रिया की निगरानी आवश्यक थी।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग की किसी अधिकारी की मिलीभगत साबित होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस विधायकों के साथ भी की बैठक
मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लेकर डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के कांग्रेस विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के साथ भी बातचीत की पहल की है।
मंगलवार, 6 अक्टूबर को उन्होंने पार्टी के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक बुलाई थी।
इस बैठक का उद्देश्य अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की स्थिति की जानकारी जुटाना था।
मुख्यमंत्री ने पार्टी नेताओं से अपने क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटाने से संबंधित शिकायतों पर ध्यान देने को कहा।
कांग्रेस नेतृत्व इस मुद्दे पर विधानसभा क्षेत्रों से जानकारी एकत्र करने और संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायतें रखने की तैयारी कर रहा है।
दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन
मतदाता सूची को लेकर चल रहे विवाद के बीच दिल्ली में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
राहुल गांधी और विपक्ष के कई सांसदों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में भी लिया था।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की जा रही है।
दूसरी ओर भाजपा और चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात तथा जानबूझकर मतदाताओं के नाम हटाने के आरोपों को खारिज किया है।
मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा पर दिया जोर
डीके शिवकुमार ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उनके अनुसार, लोकतंत्र में मतदान का अधिकार प्रत्येक पात्र नागरिक के लिए महत्वपूर्ण है और इसे सुरक्षित रखना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
फिलहाल मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद जारी है।
शिवकुमार ने आरोपों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं चुनाव आयोग अपने पुनरीक्षण कार्य को निर्धारित नियमों के तहत संचालित करने की बात कह रहा है।
अब इस विवाद में उपलब्ध दस्तावेजों, वास्तविक नाम हटाने के मामलों और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों से ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।





