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नई दिल्ली। आर्केडिया हिलाक्स आवासीय सोसाइटी के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले से जुड़े बिल्डर शाश्वत गर्ग की इंपीरियल वैली परियोजना में जमीन के सौदों को लेकर एक और मामला सामने आया है। इस बार विवाद 19 भूखंडों और करीब 7.30 करोड़ रुपये की रकम से जुड़ा है। दिल्ली निवासी कारोबारी प्रियदर्शी अशोक और उनके स्वजनों ने आरोप लगाया है कि उनसे भूखंडों की पूरी कीमत लेने और बिक्री का करार करने के बावजूद उनके नाम रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
मामला रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) तक पहुंचने के बाद भूखंडों से संबंधित दस्तावेजों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि जिन भूखंडों की पूरी रकम प्रियदर्शी अशोक और उनके स्वजनों से ली गई थी, उनमें से कुछ भूखंड पहले ही दूसरे लोगों को बेचे जा चुके थे। रेरा की फाइल में कथित रूप से ऐसे भूखंडों के पहले किए गए विक्रय विलेख दर्ज होने की बात सामने आई है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार इंपीरियल वैली परियोजना में उन्होंने कुल 19 भूखंड खरीदने के लिए सौदा किया था। इन भूखंडों की कीमत करीब 7.30 करोड़ रुपये बताई गई है। उनका दावा है कि पूरी रकम का भुगतान करने के बाद उनके पक्ष में बिक्री का करार भी किया गया। इसके बाद भूखंडों की रजिस्ट्री उनके नाम होनी थी, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
समय बीतने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं होने पर मामला विवाद में बदल गया। शिकायतकर्ताओं ने अपने भूखंडों और भुगतान को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद मामला रेरा तक पहुंचा, जहां परियोजना और भूखंडों से जुड़े दस्तावेज सामने आने पर कथित रूप से पता चला कि कुछ भूखंडों को पहले ही अन्य लोगों के नाम बेचा जा चुका था।
इस खुलासे ने पूरे जमीन सौदे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनसे 19 भूखंडों की पूरी कीमत ली गई और बिक्री का करार किया गया, वहीं दूसरी तरफ रेरा की फाइल में इन्हीं में से कुछ भूखंडों के पुराने विक्रय विलेख दर्ज होने की बात सामने आई है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कुछ भूखंड पहले ही दूसरे लोगों को बेचे जा चुके थे तो उन्हीं भूखंडों को लेकर दोबारा बिक्री का करार कैसे किया गया। शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोप इसी बिंदु पर केंद्रित हैं। उनका कहना है कि उन्होंने भूखंड खरीदने के लिए पूरी रकम दी, लेकिन उन्हें संपत्ति का वैधानिक स्वामित्व नहीं मिल पाया।
प्रियदर्शी अशोक और उनके स्वजनों का आरोप है कि उन्होंने सौदे की सभी शर्तों के अनुसार भुगतान किया था। इसके बावजूद भूखंडों की रजिस्ट्री उनके पक्ष में नहीं की गई। रजिस्ट्री नहीं होने के कारण उन्हें संबंधित भूखंडों पर वैधानिक अधिकार मिलने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
मामले में करीब 7.30 करोड़ रुपये की बड़ी रकम शामिल होने के कारण विवाद गंभीर हो गया है। शिकायत में कुल 19 भूखंडों का जिक्र है। इन सभी भूखंडों को लेकर भुगतान और बिक्री करार किए जाने का दावा किया गया है। रेरा में मामला पहुंचने के बाद दस्तावेजों से सामने आई जानकारी ने शिकायतकर्ताओं की चिंता और बढ़ा दी।
इस मामले का संबंध इंपीरियल वैली परियोजना से बताया जा रहा है। यह परियोजना बिल्डर शाश्वत गर्ग से जुड़ी है। गर्ग का नाम इससे पहले आर्केडिया हिलाक्स आवासीय सोसाइटी के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी के आरोपों में सामने आ चुका है। आरोप है कि वह परिवार समेत फरार है। अब इंपीरियल वैली परियोजना में 19 भूखंडों को लेकर सामने आए विवाद ने जमीन के सौदों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायतकर्ताओं के आरोपों के मुताबिक मामला केवल रजिस्ट्री में देरी का नहीं है। विवाद इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि जिन संपत्तियों के लिए रकम लेने का दावा किया गया है, उनमें से कुछ के पहले ही बेचे जाने से संबंधित दस्तावेज रेरा की फाइल में दर्ज बताए जा रहे हैं। यदि एक ही भूखंड को लेकर अलग-अलग लोगों के पक्ष में सौदे से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं तो इससे स्वामित्व को लेकर भी विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।
रेरा तक मामला पहुंचने के बाद अब संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण हो गए हैं। बिक्री करार, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और पहले किए गए विक्रय विलेख पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनके पास 19 भूखंडों के लिए किए गए भुगतान और बिक्री करार से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं।
दूसरी ओर रेरा की फाइल में कथित रूप से मिले पुराने विक्रय विलेख यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि संबंधित भूखंडों का वास्तविक स्वामित्व किसके पास था और अलग-अलग समय पर इनके संबंध में कौन-कौन से सौदे किए गए। अब इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
रियल एस्टेट परियोजनाओं में किसी संपत्ति की खरीद के लिए बिक्री करार और अंतिम रजिस्ट्री महत्वपूर्ण चरण होते हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार उनके मामले में भुगतान और करार की प्रक्रिया तो पूरी हुई, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी। इसी बीच कुछ भूखंडों के पुराने विक्रय विलेख सामने आने के दावे ने विवाद को और गहरा कर दिया।
प्रियदर्शी अशोक और उनके स्वजनों की शिकायत में करीब 7.30 करोड़ रुपये की रकम शामिल है। ऐसे में यह इंपीरियल वैली परियोजना से जुड़ा बड़ा जमीन विवाद बन गया है। फिलहाल शिकायतकर्ताओं के आरोपों और रेरा की फाइल में मौजूद बताए जा रहे दस्तावेजों के आधार पर मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब इस पूरे प्रकरण में 19 भूखंडों से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। किस भूखंड का सौदा कब और किस व्यक्ति के साथ हुआ, भुगतान किस आधार पर लिया गया और रजिस्ट्री क्यों नहीं हुई, इन सवालों के जवाब से ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।





