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नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित ‘एसेट रिकवरी इंटरएजेंसी नेटवर्क-एशिया पैसिफिक’ (ARIN-AP) की 11वीं वार्षिक आम बैठक का समापन हो गया। तीन दिनों तक चली इस बैठक में सीमा-पार संपत्तियों का पता लगाने, उनकी जब्ती, प्रबंधन और अपराध से अर्जित आय की वापसी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक का आयोजन भारत की 2026 की ARIN-AP अध्यक्षता के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने किया था।
बैठक के समापन अवसर पर प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक राहुल नवीन ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की सिफारिशों में हाल में किए गए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि FATF की सिफारिश संख्या 4 और 38 में हुए बदलाव इस बात पर असर डालेंगे कि म्यूचुअल इवैल्यूएशन यानी आपसी मूल्यांकन के अगले दौर में संपत्ति की जब्ती से जुड़ी व्यवस्थाओं का आकलन किस तरह किया जाएगा।
राहुल नवीन ने अपने समापन संबोधन में कहा कि तीन दिवसीय बैठक के दौरान हुई चर्चा और अलग-अलग देशों एवं क्षेत्रों के प्रतिनिधियों द्वारा साझा किए गए अनुभव ARIN-AP के सदस्यों के लिए उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने कहा कि सदस्य एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर आपसी मूल्यांकन के अगले दौर के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
ARIN-AP की इस बैठक में सदस्य क्षेत्रों और ऑब्जर्वर संगठनों से जुड़े अभियोजक, जांचकर्ता, एसेट मैनेजर, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस अधिकारी और नीति विशेषज्ञ शामिल हुए। तीन दिनों तक अलग-अलग सत्रों में वित्तीय अपराधों से जुड़ी संपत्तियों की पहचान और उनकी वापसी से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक का एक प्रमुख विषय सीमा-पार एसेट ट्रेसिंग रहा। वित्तीय अपराधों के मामलों में अपराध से अर्जित संपत्ति एक देश से दूसरे देश तक पहुंच सकती है। ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों के बीच सूचनाओं और अनुभवों का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण माना जाता है। बैठक में इसी तरह के मामलों में एजेंसियों के बीच सहयोग को लेकर चर्चा की गई।
इसके अलावा अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती से संबंधित व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से विचार किया गया। विभिन्न सदस्य क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और इस बात पर चर्चा की कि अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं के बीच समन्वय करते हुए संपत्ति की पहचान और जब्ती की प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाया जा सकता है।
जब्त की गई संपत्तियों के प्रबंधन का विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहा। किसी वित्तीय अपराध से जुड़ी संपत्ति का पता लगाने और उसे जब्त करने के बाद उसके प्रभावी प्रबंधन की जरूरत होती है। इस क्षेत्र में काम करने वाले एसेट मैनेजरों और नीति विशेषज्ञों ने अपने अनुभवों और व्यवस्थाओं को साझा किया।
अपराध से हुई कमाई की वापसी भी तीन दिवसीय बैठक के प्रमुख विषयों में रही। सीमा-पार वित्तीय अपराधों में संपत्ति और धन की पहचान के बाद उसकी वापसी की प्रक्रिया कई एजेंसियों और कानूनी व्यवस्थाओं से जुड़ी होती है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की भूमिका को लेकर प्रतिभागियों के बीच चर्चा हुई।
ED डायरेक्टर राहुल नवीन ने FATF की सिफारिश संख्या 4 और 38 में हुए हालिया बदलावों को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन बदलावों का असर आने वाले म्यूचुअल इवैल्यूएशन में जब्ती संबंधी व्यवस्थाओं के मूल्यांकन पर पड़ेगा। ऐसे में सदस्य क्षेत्रों के लिए इन बदलावों को समझना और उनके अनुरूप अपनी तैयारियों को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा कि बैठक में हुए विचार-विमर्श से ARIN-AP के सदस्य एक-दूसरे के अनुभवों का लाभ उठा सकते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में अपनाई जा रही प्रक्रियाओं, चुनौतियों और अनुभवों को साझा करने से सदस्य अपने यहां मौजूद व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
तीन दिवसीय बैठक में शामिल विशेषज्ञों की अलग-अलग भूमिकाओं के कारण चर्चा का दायरा भी व्यापक रहा। अभियोजकों ने कानूनी प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर अपने अनुभव रखे, जबकि जांच अधिकारियों ने वित्तीय अपराधों की जांच और संपत्तियों का पता लगाने से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। फाइनेंशियल इंटेलिजेंस अधिकारियों ने वित्तीय सूचनाओं की भूमिका से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।
इसी तरह एसेट मैनेजरों की भागीदारी ने जब्त की गई संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े पहलुओं को चर्चा में शामिल किया। नीति विशेषज्ञों ने नियमों, प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के व्यापक ढांचे पर अपने विचार रखे। इस तरह बैठक में संपत्ति की पहचान से लेकर जब्ती, प्रबंधन और वापसी तक की पूरी प्रक्रिया पर चर्चा हुई।
भारत की 2026 की ARIN-AP अध्यक्षता के तहत आयोजित इस बैठक की मेजबानी प्रवर्तन निदेशालय ने की। बैठक में सदस्य क्षेत्रों और ऑब्जर्वर संगठनों की भागीदारी ने सीमा-पार वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए एजेंसियों के बीच सहयोग और अनुभव साझा करने पर जोर दिया।
ARIN-AP जैसे मंच का उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में संपत्ति की बरामदगी से जुड़े मामलों में संबंधित एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। खास तौर पर ऐसे मामलों में जहां अपराध से अर्जित धन या संपत्ति अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंच जाती है, एजेंसियों के बीच संपर्क और सूचनाओं का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बैठक में FATF की सिफारिशों में बदलाव का मुद्दा इसलिए भी प्रमुख रहा क्योंकि आने वाले मूल्यांकन में देशों और क्षेत्रों की जब्ती से जुड़ी व्यवस्थाओं को नए बदलावों के संदर्भ में देखा जाएगा। राहुल नवीन ने सदस्य क्षेत्रों के लिए आपसी अनुभवों से सीखने को अगले मूल्यांकन दौर की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
30 सितंबर को संपन्न हुई तीन दिवसीय बैठक के समापन पर ED डायरेक्टर ने उम्मीद जताई कि यहां हुई चर्चा सदस्य क्षेत्रों के लिए आगे की तैयारियों में मददगार होगी। उन्होंने कहा कि साझा अनुभवों और विचार-विमर्श से सदस्यों को अपनी व्यवस्थाओं को समझने और म्यूचुअल इवैल्यूएशन के अगले दौर के लिए तैयारी करने में सहायता मिलेगी।
नई दिल्ली में हुई ARIN-AP की 11वीं वार्षिक आम बैठक में सीमा-पार संपत्ति का पता लगाने, जब्ती, प्रबंधन और अपराध से अर्जित आय की वापसी जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। वहीं FATF की सिफारिश संख्या 4 और 38 में हालिया बदलावों को आने वाले समय में जब्ती व्यवस्थाओं के मूल्यांकन के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया।
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