- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- अयोध्या में अखिलेश के...
दिल्ली-एनसीआर
अयोध्या में अखिलेश के प्रस्तावित दौरे पर चर्चा, RSS नेता ने दी प्रतिक्रिया
Ratna Netam
7 Nov 2026 9:21 PM IST

x
अयोध्या। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दौरे को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने मंदिर दर्शन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को मंदिर जाने और धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने के विषय को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अखिलेश यादव के राम मंदिर जाने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।इंद्रेश कुमार ने धार्मिक आस्था और राजनीति के बीच अंतर बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंदिर जाना व्यक्तिगत श्रद्धा और विश्वास से जुड़ा विषय है। इसे राजनीतिक विवाद का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक आस्था को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देखने के बजाय उसका सम्मान किया जाना चाहिए।अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राम मंदिर और अयोध्या लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख विषय रहे हैं। मंदिर निर्माण, राम जन्मभूमि आंदोलन और धार्मिक आयोजनों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी प्रमुख के प्रस्तावित दर्शन कार्यक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक बहस को जन्म दिया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार की टिप्पणी को इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने संदेश में मंदिर दर्शन को राजनीतिक मुद्दा बनाने से बचने की बात कही। उनके अनुसार, धार्मिक स्थलों पर जाने का विषय श्रद्धा से संबंधित है और इस पर अनावश्यक राजनीतिक विवाद नहीं होना चाहिए।समाजवादी पार्टी के नेता तेजनारायण पांडेय पवन ने जानकारी दी है कि अखिलेश यादव 12 दिसंबर को अपनी पत्नी और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव सहित परिवार के सदस्यों के साथ अयोध्या पहुंचने वाले हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार वह राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन करेंगे और हनुमानगढ़ी मंदिर में भी पूजा-अर्चना करेंगे। इस दौरान उनका साधु-संतों से मुलाकात करने का भी कार्यक्रम है।जनवरी 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अखिलेश यादव का यह पहला प्रस्तावित राम मंदिर दर्शन होगा। इससे पहले वह अयोध्या में अन्य कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं, लेकिन नवनिर्मित राम मंदिर में दर्शन करने नहीं पहुंचे थे। इस कारण उनके आगामी दौरे को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
अखिलेश यादव के प्रस्तावित दौरे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी टिप्पणी की है। अयोध्या में आयोजित दसवें दीपोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने रामभक्तों पर गोली चलवाई और संतों के साथ दुर्व्यवहार किया, उन्हें अयोध्या आने से पहले माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने वर्ष 1990 में कारसेवकों पर हुई पुलिस गोलीबारी का उल्लेख किया। उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार थी।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान और आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार की टिप्पणी में अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। योगी आदित्यनाथ ने राम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास और तत्कालीन सरकार की भूमिका को प्रमुखता दी, जबकि इंद्रेश कुमार ने मंदिर दर्शन को राजनीतिक विवाद से अलग रखने की बात कही।इंद्रेश कुमार की टिप्पणी का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि अयोध्या का राम मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का विषय रहा है। राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा तक विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए हैं।
राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। इसके बाद देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते रहे हैं। राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के मंदिर दर्शन को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है।अखिलेश यादव ने इससे पहले कहा था कि वह इटावा में समाजवादी पार्टी से जुड़े केदारेश्वर धाम मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद अयोध्या में रामलला के दर्शन करने जाएंगे। अब उनके प्रस्तावित दौरे की तारीख सामने आने के बाद एक बार फिर राम मंदिर और राजनीतिक दलों के रुख को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।समाजवादी पार्टी की ओर से इस दौरे को धार्मिक कार्यक्रम बताया गया है। पार्टी नेता पवन पांडेय के अनुसार, अखिलेश यादव अयोध्या में मंदिरों के दर्शन करने के साथ संतों का आशीर्वाद भी लेंगे। वहीं भाजपा के कुछ नेताओं ने उनके प्रस्तावित दौरे के समय को लेकर सवाल उठाए हैं।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे राजनीतिक चर्चा में बने हुए हैं। ऐसे समय में अखिलेश यादव के मंदिर दर्शन की घोषणा और उस पर अलग-अलग नेताओं की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की धार्मिक यात्रा के उद्देश्य को लेकर राजनीतिक दलों के दावे उनके अपने दृष्टिकोण हैं।इंद्रेश कुमार ने मंदिर जाने को लेकर राजनीति नहीं करने की बात कहकर धार्मिक आस्था के सम्मान का मुद्दा उठाया है। उनका संदेश इस विचार पर केंद्रित है कि मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना का विषय राजनीतिक मतभेदों से अलग रखा जाना चाहिए।धार्मिक स्थलों पर जाने का अधिकार और व्यक्तिगत आस्था का सम्मान भारतीय समाज में महत्वपूर्ण विषय हैं। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग भी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं। ऐसे में किसी नेता के मंदिर जाने या नहीं जाने को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस अक्सर व्यापक चर्चा का रूप ले लेती है।अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे से पहले सामने आई इंद्रेश कुमार की टिप्पणी ने इसी मुद्दे को एक नया संदर्भ दिया है। जहां राजनीतिक दल मंदिर दर्शन को लेकर एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आरएसएस नेता ने इसे राजनीतिक विवाद से दूर रखने की अपील की है।फिलहाल अखिलेश यादव का 12 दिसंबर का प्रस्तावित अयोध्या दौरा चर्चा में है। उनके रामलला और हनुमानगढ़ी दर्शन के कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं। इस बीच इंद्रेश कुमार का बयान धार्मिक आस्था और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच अंतर बनाए रखने के संदेश के रूप में सामने आया है।
Next Story





