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लोकसभा में डिजिटल सबूतों को मंजूरी, बैंक रिकॉर्ड कानून में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच बुधवार को लोकसभा ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को मंजूरी दे दी। इस विधेयक के पारित होने के बाद डिजिटल और वर्चुअल रिकॉर्ड को अदालतों में मान्य साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
इससे पहले सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। पहले के स्थगन के बाद जब लोकसभा की बैठक दोपहर दो बजे दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी जारी रखी। उन्होंने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल पर चर्चा की मांग को लेकर पीठ के आग्रह को नजरअंदाज कर दिया और सदन में विरोध प्रदर्शन करते रहे।
हंगामे के बीच सरकार ने विधेयक को आगे बढ़ाया। विपक्षी सदस्यों के विरोध के बावजूद बिल पर चर्चा और प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद इसे सदन से पारित कर दिया गया। विधेयक का उद्देश्य बैंकिंग दस्तावेजों और रिकॉर्ड से जुड़े मौजूदा कानून को आधुनिक तकनीकी जरूरतों के अनुरूप बनाना है।
नए प्रावधानों के तहत डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज और वर्चुअल माध्यम से उपलब्ध बैंकिंग सूचनाओं को कानूनी प्रक्रिया में साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकेगा। इससे अदालतों में बैंकिंग लेनदेन और वित्तीय मामलों से जुड़े मामलों की सुनवाई में डिजिटल माध्यम से उपलब्ध रिकॉर्ड का उपयोग आसान होगा।
सरकार का कहना है कि मौजूदा समय में बैंकिंग व्यवस्था तेजी से डिजिटल हो रही है। ऐसे में पुराने प्रावधानों को बदलना जरूरी है, ताकि डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को भी उसी तरह कानूनी मान्यता मिल सके जैसे पारंपरिक दस्तावेजों को मिलती है।
विधेयक के समर्थकों का कहना है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और तेज बनाया जा सकेगा। बैंकिंग से जुड़े मामलों में अब इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, ऑनलाइन दस्तावेज और डिजिटल प्रमाणों को अदालत में पेश करने में सुविधा होगी। इससे जांच एजेंसियों और न्यायालयों को भी सहायता मिलेगी।
वहीं, विपक्षी दलों ने सदन में कई मुद्दों को लेकर विरोध जारी रखा। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए सरकार पर उनकी मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। हंगामे के कारण सदन की सामान्य कार्यवाही प्रभावित रही।
लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की अपील की, लेकिन विपक्षी सदस्यों का विरोध जारी रहा। इसके बाद भी विधायी कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया और बिल को पारित कर दिया गया।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस कानून का संबंध बैंकों में रखे जाने वाले रिकॉर्ड और उनके न्यायिक उपयोग से है। समय के साथ बैंकिंग प्रणाली में बड़े बदलाव हुए हैं और अब अधिकांश लेनदेन डिजिटल माध्यम से हो रहे हैं। ऐसे में डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने से वित्तीय अपराधों, बैंकिंग विवादों और अन्य मामलों की जांच में तेजी आ सकती है। हालांकि, डिजिटल साक्ष्यों की प्रमाणिकता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा।
सरकार की ओर से कहा गया है कि नए कानून में तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किए गए हैं। इससे बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और न्यायिक प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाया जा सकेगा।
लोकसभा में विधेयक पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। अब इस विधेयक को आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के दौर में यह विधेयक बैंकिंग और न्यायिक व्यवस्था के बीच तालमेल बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इसके लागू होने के बाद अदालतों में डिजिटल रिकॉर्ड के इस्तेमाल को लेकर एक स्पष्ट कानूनी ढांचा उपलब्ध हो सकेगा।





