- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- CWC बैठक में नीतीश...
CWC बैठक में नीतीश कुमार को लेकर मतभेद, दिग्विजय सिंह और सोनिया गांधी की अलग-अलग राय

नई दिल्ली। कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की बैठक में जदयू प्रमुख नीतीश कुमार के 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी INDIA गठबंधन छोड़ने का मुद्दा भी उठा। बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि यदि नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन में बने रहते तो लोकसभा चुनाव के नतीजे अलग हो सकते थे। हालांकि इस मुद्दे पर सोनिया गांधी ने उनसे अलग राय रखी और सूत्रों के अनुसार कहा कि नीतीश कुमार का गठबंधन से बाहर जाना अंततः अच्छा ही रहा।
मंगलवार को हुई CWC बैठक में मुख्य रूप से चुनाव आयोग, मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और विपक्ष की आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। इसी दौरान दिग्विजय सिंह ने विपक्षी गठबंधन के पुराने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से अलग होने की बात उठाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों को उस समय नीतीश कुमार को गठबंधन में बनाए रखने के लिए और प्रयास करने चाहिए थे।
दिग्विजय सिंह का तर्क था कि नीतीश कुमार विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने वाले शुरुआती नेताओं में शामिल थे। 2023 में विपक्षी दलों की पहली बड़ी बैठक पटना में आयोजित करने में भी उनकी भूमिका रही थी। बाद में विपक्षी गठबंधन का नाम INDIA रखा गया। दिग्विजय सिंह का मानना था कि यदि नीतीश कुमार को गठबंधन में अपेक्षित भूमिका दी जाती और उन्हें साथ बनाए रखा जाता तो राजनीतिक समीकरण अलग हो सकते थे।
सूत्रों के अनुसार दिग्विजय सिंह ने बैठक में यह भी कहा कि नीतीश कुमार की उस समय INDIA गठबंधन के संयोजक पद में रुचि थी। उनका तर्क था कि यदि उनकी राजनीतिक आकांक्षाओं को बेहतर तरीके से संभाला जाता तो शायद वे गठबंधन नहीं छोड़ते। इस पर बैठक में मौजूद कुछ नेताओं ने असहमति जताई।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस तर्क से असहमति जताई। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने बैठक में कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन में बनाए रखने के लिए उनसे बातचीत की गई थी, लेकिन वह बिहार से बाहर बड़ी जिम्मेदारी लेने की स्थिति में नहीं होने की बात कहते रहे थे। इस वजह से केवल संयोजक पद का मुद्दा उनके गठबंधन छोड़ने का कारण नहीं माना जा सकता।
इसी चर्चा के दौरान सोनिया गांधी ने भी दिग्विजय सिंह के तर्क से असहमति जताई। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पहले से ही गठबंधन छोड़ने का मन बना चुके थे और उनका बाहर जाना अच्छा ही रहा। कुछ रिपोर्टों में उनके हवाले से यह भी कहा गया कि नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों के साथ भरोसा तोड़ा। चूंकि ये बातें बंद कमरे की बैठक से जुड़े सूत्रों पर आधारित हैं, कांग्रेस की ओर से इन शब्दों में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
नीतीश कुमार ने जनवरी 2024 में INDIA गठबंधन से अलग होकर फिर से भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ सरकार बनाई थी। इससे पहले वह विपक्षी दलों को एकजुट करने की मुहिम के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उनके अलग होने के बाद 2024 का लोकसभा चुनाव INDIA गठबंधन ने उनके बिना लड़ा।
दिग्विजय सिंह का कहना था कि 2024 के चुनावी नतीजों को देखते हुए विपक्ष को पुराने फैसलों से सीखने की जरूरत है। उनका जोर इस बात पर था कि भाजपा और एनडीए के खिलाफ व्यापक विपक्षी गठबंधन बनाने के लिए अधिक से अधिक दलों को साथ रखना चाहिए। उन्होंने गठबंधन विस्तार और सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया।
हालांकि सोनिया गांधी और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं की राय इससे अलग बताई गई। उनका मानना था कि नीतीश कुमार को गठबंधन में बनाए रखने के लिए प्रयास किए गए थे, लेकिन उनका राजनीतिक निर्णय पहले से तय था। इसी कारण इस मामले को कांग्रेस की ओर से की गई किसी एक रणनीतिक चूक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
CWC की बैठक में यह चर्चा ऐसे समय हुई जब कांग्रेस आगामी राजनीतिक अभियानों को लेकर रणनीति तैयार कर रही है। बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और SIR प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर भी लंबी चर्चा हुई। पार्टी ने इन मुद्दों पर विपक्षी दलों के साथ संयुक्त अभियान चलाने की बात कही है।
नीतीश कुमार को लेकर CWC के भीतर सामने आई अलग-अलग राय से यह भी स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता 2024 के लोकसभा चुनाव के राजनीतिक घटनाक्रम का अब भी अलग-अलग तरीके से आकलन कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह जहां इसे विपक्ष के लिए खोया हुआ राजनीतिक अवसर मानते दिखे, वहीं सोनिया गांधी और खरगे ने इस बात से सहमति नहीं जताई कि नीतीश कुमार को कुछ और प्रयासों से रोका जा सकता था।
बैठक के बाद जदयू नेताओं ने भी सोनिया गांधी से जुड़ी रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया दी। जदयू की ओर से कहा गया कि नीतीश कुमार को अपने राजनीतिक रिकॉर्ड के लिए कांग्रेस से किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही जदयू नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया।
इस पूरे घटनाक्रम ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन में हुए बदलावों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। नीतीश कुमार विपक्षी एकता की शुरुआती बैठकों में प्रमुख भूमिका निभाने के बाद एनडीए में लौट गए थे। अब कांग्रेस के भीतर इस बात पर अलग-अलग राय सामने आई है कि उनकी विदाई को राजनीतिक नुकसान माना जाए या गठबंधन के लिए जरूरी अलगाव।
फिलहाल कांग्रेस का ध्यान मौजूदा राजनीतिक और चुनावी मुद्दों पर है, लेकिन CWC की इस चर्चा ने साफ कर दिया है कि 2024 के चुनाव से जुड़ी रणनीतिक समीक्षा पार्टी के भीतर अब भी जारी है। नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने को लेकर दिग्विजय सिंह और सोनिया गांधी की अलग-अलग राय ने इसी आंतरिक समीक्षा को सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है।





