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MTH हॉस्पिटल में डॉक्टरों के लिए संवाद सत्र, तनाव प्रबंधन और वर्क-लाइफ बैलेंस पर जोर

Kavita2
26 Sept 2026 10:21 AM IST
MTH हॉस्पिटल में डॉक्टरों के लिए संवाद सत्र, तनाव प्रबंधन और वर्क-लाइफ बैलेंस पर जोर
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इंदौर। एमटीएच हॉस्पिटल में डॉक्टरों, पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों और सीनियर रेजिडेंट्स के लिए एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया गया। डीन डॉ. अरविंद घांघोरिया और वरिष्ठ चिकित्सकों की मौजूदगी में आयोजित इस सत्र में मेडिकल प्रोफेशन से जुड़ी चुनौतियों, तनाव प्रबंधन, काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन तथा जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

सत्र का उद्देश्य मेडिकल क्षेत्र में काम करने वाले डॉक्टरों और विद्यार्थियों को अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ मानसिक और व्यक्तिगत जीवन के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए प्रेरित करना था। अस्पताल में काम के दौरान डॉक्टरों को कई तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी, लंबे समय तक ड्यूटी, पढ़ाई और लगातार बदलती चिकित्सा जरूरतों के बीच उन्हें खुद के लिए समय निकालना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

डीन डॉ. अरविंद घांघोरिया ने संवाद के दौरान कहा कि चिकित्सा पेशे में बहुत अधिक जिम्मेदारी और समर्पण की आवश्यकता होती है। डॉक्टरों को मरीजों की देखभाल के साथ कई अन्य पेशेवर जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। खास तौर पर पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों और सीनियर रेजिडेंट्स के लिए अस्पताल की ड्यूटी के साथ पढ़ाई और प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होता है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आने वाले लोगों के लिए मरीजों की सेवा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है, लेकिन इसके साथ अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। लगातार काम और तनाव का असर व्यक्ति के निजी जीवन और कार्यक्षमता दोनों पर पड़ सकता है। इसलिए समय का सही प्रबंधन और जीवन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

सत्र में कार्यस्थल पर डॉक्टरों के सामने आने वाली अलग-अलग चुनौतियों पर खुलकर बातचीत की गई। अस्पतालों में कई बार आपात परिस्थितियां अचानक सामने आती हैं। गंभीर मरीजों का इलाज, परिजनों से संवाद और सीमित समय में महत्वपूर्ण चिकित्सा निर्णय लेना डॉक्टरों के लिए मानसिक दबाव पैदा कर सकता है। ऐसी परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना और सोच-समझकर निर्णय लेना बेहद महत्वपूर्ण माना गया।

डॉ. घांघोरिया ने डॉक्टरों और मेडिकल विद्यार्थियों से मुश्किल परिस्थितियों को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ देखने की अपील की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी पेशेवर चुनौती का सामना घबराहट या निराशा के बजाय धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ किया जाना चाहिए। मेडिकल प्रोफेशन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब लगातार प्रयास के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते। ऐसे समय में भावनात्मक संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है।

संवाद के दौरान तनाव प्रबंधन भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। डॉक्टरों की दिनचर्या सामान्य नौकरियों की तुलना में कई मामलों में अलग होती है। अस्पताल में निर्धारित ड्यूटी के अलावा आपातकालीन परिस्थितियों में अतिरिक्त समय देना पड़ सकता है। रात की ड्यूटी और लंबे समय तक अस्पताल में मौजूद रहने के कारण आराम और निजी जीवन के लिए मिलने वाला समय प्रभावित हो सकता है।

इसी वजह से डॉक्टरों को अपनी दिनचर्या में मानसिक स्वास्थ्य और आराम के लिए भी पर्याप्त समय रखने की जरूरत पर जोर दिया गया। काम के बीच छोटे ब्रेक, नियमित दिनचर्या और सहयोगियों के साथ संवाद तनाव कम करने में मददगार हो सकते हैं। वरिष्ठ डॉक्टरों का मार्गदर्शन भी युवा चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल छात्रों के लिए यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें एक साथ कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। उन्हें मरीजों की देखभाल और अस्पताल की ड्यूटी के साथ अपनी अकादमिक पढ़ाई और प्रशिक्षण भी जारी रखना होता है। परीक्षाओं और पेशेवर जिम्मेदारियों के कारण दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में समय का सही इस्तेमाल और प्राथमिकताओं का निर्धारण जरूरी हो जाता है।

सीनियर रेजिडेंट्स के सामने भी इसी तरह की चुनौतियां होती हैं। अस्पताल में मरीजों की देखभाल के साथ जूनियर डॉक्टरों और छात्रों का मार्गदर्शन तथा विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं में जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। इसलिए उनके लिए भी वर्क-लाइफ बैलेंस और तनाव प्रबंधन महत्वपूर्ण है।

सत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया कि डॉक्टरों के बीच आपसी संवाद का वातावरण होना चाहिए। अगर किसी चिकित्सक या विद्यार्थी को काम के दबाव के कारण परेशानी महसूस हो रही है तो उसे अपने वरिष्ठों और सहयोगियों से बात करनी चाहिए। टीम के रूप में काम करने से कई समस्याओं का समाधान आसान हो सकता है।

मेडिकल प्रोफेशन में काम करने वाले लोगों का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना मरीजों की देखभाल के लिए भी महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक तनाव में रहने से निर्णय लेने की क्षमता और काम की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के लिए सकारात्मक और सहयोगपूर्ण कार्य वातावरण तैयार करने पर ध्यान देना जरूरी माना गया।

डॉ. घांघोरिया ने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन के बीच सही संतुलन बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाने के साथ परिवार और निजी जीवन के लिए भी समय निकालना चाहिए। लगातार काम में व्यस्त रहने के बजाय ऐसी दिनचर्या बनानी चाहिए जिसमें आराम और व्यक्तिगत गतिविधियों के लिए भी जगह हो।

सत्र में जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया बनाए रखने की जरूरत पर भी चर्चा हुई। मेडिकल क्षेत्र में सफलता के साथ कई कठिन अनुभव भी सामने आते हैं। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों से लगातार संपर्क डॉक्टरों के लिए भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें संतुलित तरीके से संभालना महत्वपूर्ण है।

वरिष्ठ चिकित्सकों की मौजूदगी में हुए इस संवाद ने युवा डॉक्टरों और मेडिकल विद्यार्थियों को अपने अनुभव और चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर दिया। इस तरह के सत्र अस्पताल के भीतर बेहतर संवाद और सहयोग की संस्कृति विकसित करने में उपयोगी हो सकते हैं।

एमटीएच हॉस्पिटल में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि चिकित्सा सेवा में समर्पण जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी डॉक्टरों का स्वयं के स्वास्थ्य और जीवन पर ध्यान देना भी है। तनाव को सही तरीके से संभालने, समय का बेहतर प्रबंधन करने और सकारात्मक सोच बनाए रखने से पेशेवर जिम्मेदारियों और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

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