दिल्ली-एनसीआर

सीट शेयरिंग पर कांग्रेस को धर्मेंद्र यादव की दो टूक मीडिया में न रखें मांग

Ratna Netam
5 Oct 2026 6:58 PM IST
सीट शेयरिंग पर कांग्रेस को धर्मेंद्र यादव की दो टूक मीडिया में न रखें मांग
x
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सपा नेता और सांसद धर्मेंद्र यादव ने कांग्रेस नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कितनी और कौन-सी सीटों पर चुनाव लड़ना है, इससे जुड़ी अपनी मांगों को मीडिया के सामने रखने के बजाय सीधे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने रखना चाहिए।धर्मेंद्र यादव का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे की चर्चा तेज है। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी हाल में कहा था कि INDIA गठबंधन के सहयोगियों के बीच सीट शेयरिंग का फैसला अक्टूबर में ही हो जाना चाहिए और कांग्रेस तथा सपा को सम्मान और प्रतिनिधित्व के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
मीडिया में मांग रखने की जरूरत नहीं: धर्मेंद्र यादव
धर्मेंद्र यादव ने कांग्रेस सहयोगियों को संदेश देते हुए कहा कि जिन सीटों पर कांग्रेस को लगता है कि वह जीत सकती है, उसकी चर्चा मीडिया में करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, कांग्रेस नेताओं को अपनी बात सीधे सपा नेतृत्व के सामने रखनी चाहिए।उन्होंने अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए कहा कि पूरा देश उनके नेतृत्व के बारे में जानता है और वह बड़े दिल वाले नेता हैं। धर्मेंद्र यादव ने कांग्रेस नेताओं से सीट शेयरिंग को लेकर मीडिया में बयान देना बंद करने की अपील की।धर्मेंद्र यादव इससे पहले भी सपा-कांग्रेस संबंधों पर प्रतिक्रिया देते हुए कह चुके हैं कि सीट शेयरिंग और गठबंधन से जुड़े मुद्दों पर अखिलेश यादव और कांग्रेस नेतृत्व मिलकर फैसला करेंगे। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सपा से सार्वजनिक टकराव के बजाय चुनावी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी थी।
2027 चुनाव में जीत का जताया भरोसा
धर्मेंद्र यादव ने 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी भरोसा जताया। सपा की ओर से विधानसभा चुनाव की तैयारियां पहले ही तेज कर दी गई हैं और पार्टी विभिन्न स्तरों पर अपने संगठन तथा चुनावी रणनीति पर काम कर रही है।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर सपा और कांग्रेस के नेताओं के बयान लगातार सामने आ रहे हैं। दोनों दल INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं और 2027 के चुनाव में उनके बीच सीटों के तालमेल को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है।
अखिलेश ने भी नेताओं को दी थी हिदायत
इससे पहले अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के नेताओं से भी सीट शेयरिंग से जुड़ी राय और चिंताओं को सार्वजनिक मंचों के बजाय पार्टी के भीतर रखने को कहा था। उन्होंने कहा था कि सीटों के बंटवारे को लेकर नेताओं के जो भी सुझाव हैं, उन पर आंतरिक चर्चा की जाएगी।अखिलेश यादव ने हाल में यह भी कहा कि गठबंधन के लिए अहम सवाल यह नहीं है कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिलती हैं या कौन-सी सीट किसके हिस्से आती है, बल्कि लक्ष्य गठबंधन की जीत सुनिश्चित करना होना चाहिए।ऐसे में धर्मेंद्र यादव की कांग्रेस नेताओं को दी गई सलाह भी दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय नेतृत्व स्तर की बातचीत से सुलझाने की दिशा में देखी जा रही है।
कांग्रेस चाहती है जल्द हो सीटों का फैसला
दूसरी तरफ कांग्रेस की ओर से भी सीट शेयरिंग को लेकर बयान सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सीट शेयरिंग का फैसला जल्द किया जाना चाहिए। उन्होंने दोनों दलों के साथ आगे बढ़ने और बातचीत के जरिए सीटों पर सहमति बनाने की बात कही है।यूपी की राजनीति में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। दोनों दलों के सामने अपने-अपने संगठन और दावेदारी के साथ गठबंधन के समीकरण को संतुलित करने की चुनौती है।
सीटों से ज्यादा गठबंधन की जीत पर जोर
सपा नेतृत्व की ओर से फिलहाल सार्वजनिक रूप से गठबंधन की जीत को सीटों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। अखिलेश यादव ने कहा है कि विपक्षी गठबंधन की सफलता व्यक्तिगत दलों को मिलने वाली सीटों की संख्या से बड़ी बात है।इसी बीच धर्मेंद्र यादव के बयान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत मीडिया के जरिए नहीं, बल्कि दोनों दलों के नेतृत्व के बीच हो।अब नजर इस बात पर रहेगी कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस सीट शेयरिंग पर कब और किस तरह सहमति बनाते हैं। फिलहाल दोनों दलों की ओर से गठबंधन बनाए रखने और आपसी बातचीत के जरिए चुनावी रणनीति तय करने के संकेत दिए जा रहे हैं।
Next Story