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राहुल गांधी पर धर्मेंद्र प्रधान का हमला

Kavita2
20 Sept 2026 9:57 AM IST
राहुल गांधी पर धर्मेंद्र प्रधान का हमला
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नई दिल्ली/इंदौर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कार्यक्रम में राहुल गांधी की ओर से शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए उन पर राजनीतिक नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया है। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह इंदौर में एक माइक्रोफोन और ‘सिस्टम बनाम छात्र’ का बनाया हुआ नैरेटिव लेकर पहुंचे थे।

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी छात्रों के सामने आने वाली हर चुनौती को एक ‘कब्जे वाले सिस्टम’ के प्रमाण के रूप में पेश कर रहे हैं और शिक्षा से जुड़े जटिल मुद्दों को राजनीतिक नारों तक सीमित कर रहे हैं। प्रधान ने कहा कि छात्रों को अपने सवालों के जवाब और समस्याओं का समाधान चाहिए।

इंदौर में छात्रों से राहुल गांधी का संवाद

राहुल गांधी ने 19 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों से संवाद किया। कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक और उच्च शिक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था सवाल पूछने वाले विद्यार्थियों से असहज होती है। उन्होंने छात्रों से सवाल पूछते रहने और अपने अधिकारों को लेकर आवाज उठाने की बात कही।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी अपनी समस्याएं सामने रखीं। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, भर्ती में देरी और नर्सिंग शिक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल थे। एक नर्सिंग छात्रा ने पढ़ाई और परीक्षा में देरी से जुड़ी अपनी समस्या बताई, जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने उम्र सीमा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी चिंताएं रखीं।

धर्मेंद्र प्रधान ने आंकड़ों के साथ दिया जवाब

राहुल गांधी की आलोचना के जवाब में धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्र सरकार के शिक्षा क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों और योजनाओं का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 2014-15 के 23.7 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 30 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने पीएम-विद्यालक्ष्मी और पीएम-ऊषा जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए इन्हें विद्यार्थियों के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के उदाहरण के रूप में पेश किया। ये आंकड़े और निष्कर्ष प्रधान की ओर से राहुल गांधी की आलोचना के जवाब में रखे गए।

प्रधान ने परीक्षा प्रणाली में किए गए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के विस्तार और सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए बनाए गए कानून को सरकार की कार्रवाई के उदाहरण के तौर पर सामने रखा।

पेपर लीक का मुद्दा फिर चर्चा में

राहुल गांधी के कार्यक्रम में पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता का मुद्दा उठने के बाद इस विषय पर भी राजनीतिक बहस तेज हुई। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों से निपटने के लिए कानून और तकनीकी उपायों पर काम किया है। दूसरी तरफ राहुल गांधी लगातार पेपर लीक को युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रमुख मुद्दे के रूप में उठा रहे हैं।

धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2026 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उनका इस्तीफा NEET-UG पेपर लीक विवाद और इसके खिलाफ चले छात्र आंदोलनों के बाद आया था। उस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े विरोध प्रदर्शन, अनशन और ‘संसद चलो’ अभियान भी चर्चा में रहे थे।

राहुल गांधी ने ‘सिस्टम’ पर लगाए आरोप

इंदौर में राहुल गांधी ने दावा किया कि देश का मौजूदा ‘सिस्टम’ सवाल पूछने वाले छात्रों को प्रोत्साहित नहीं करता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत कई लोगों का नाम लेते हुए व्यवस्था को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए। ये राहुल गांधी के आरोप हैं; संबंधित पक्षों की ओर से इन दावों का विरोध किया गया है।

राहुल गांधी ने कार्यक्रम में रोजगार, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और निजीकरण जैसे विषय भी उठाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए जिसमें वे सवाल पूछ सकें और अपनी समस्याएं खुलकर सामने रख सकें।

भाजपा नेताओं ने किया पलटवार

राहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद धर्मेंद्र प्रधान के अलावा भाजपा के अन्य नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए उन पर छात्रों के मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। दूसरी तरफ कांग्रेस राहुल गांधी के कार्यक्रम को छात्रों की समस्याएं सीधे सुनने और उन्हें राजनीतिक विमर्श में जगह देने की पहल के रूप में पेश कर रही है।

इस तरह इंदौर का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम शिक्षा और युवाओं के सवालों के साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच भी बन गया है। राहुल गांधी जहां व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा और धर्मेंद्र प्रधान सरकार की योजनाओं और शिक्षा से जुड़े आंकड़ों के जरिए उनके आरोपों का जवाब दे रहे हैं।

आने वाले दिनों में शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं और रोजगार जैसे विषयों पर यह राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के साथ छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला रहे हैं।

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