- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- देवनीमोरी बुद्ध...
दिल्ली-एनसीआर
देवनीमोरी बुद्ध अवशेषों की प्रदर्शनी भारत-श्रीलंका के आध्यात्मिक संबंधों को करेगी उजागर
SHIDDHANT
4 Feb 2026 8:18 PM IST

x
Delhi दिल्ली। ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष बुधवार को भारतीय वायुसेना के सी-130जे विमान के जरिए श्रीलंका पहुंच गए। यह अवसर भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण क्षण माना जा रहा है। इन पवित्र अवशेषों के श्रीलंका पहुंचने पर वहां धार्मिक श्रद्धा और सम्मान का विशेष वातावरण देखने को मिला।
श्रीलंका के हवाई अड्डे पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री डॉ. हिनिदुमा सुनील सेनेवी और लोक प्रशासन, प्रांतीय परिषदों एवं स्थानीय सरकार के मंत्री एएचएमएच अभयरत्ना ने कार्यवाहक उच्चायुक्त के साथ मिलकर देवनीमोरी अवशेषों का औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान बौद्ध भिक्षुओं, अधिकारियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया।
इन पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी 4 से 10 फरवरी तक श्रीलंका की राजधानी कोलंबो स्थित प्रसिद्ध गंगारामया मंदिर में आयोजित की जाएगी। आयोजकों के अनुसार, इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और आगंतुकों के मंदिर पहुंचने की उम्मीद है। गंगारामया मंदिर, जो श्रीलंका के प्रमुख बौद्ध स्थलों में से एक है, ने अवशेषों के सुरक्षित प्रदर्शन और सार्वजनिक दर्शन के लिए व्यापक और सुव्यवस्थित इंतजाम किए हैं।
श्रीलंका रवाना होने से पहले राजधानी स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में और उसके बाद हवाई अड्डे पर विशेष पवित्र मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इन समारोहों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने प्रार्थना कर अवशेषों के प्रति अपनी आस्था और सम्मान प्रकट किया। यह दृश्य बौद्ध धर्म की गहरी आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाने वाला रहा।
बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र माने जाने वाले देवनीमोरी अवशेष पहली बार अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए विदेश यात्रा पर गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस ऐतिहासिक आयोजन के जरिए न केवल श्रीलंका, बल्कि अन्य देशों से भी हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस प्रदर्शनी को देखने पहुंचेंगे, जिससे बौद्ध विरासत के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ेगी।
अधिकारियों ने बताया कि यह प्रदर्शनी भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों का प्रतीक है। इसे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को सशक्त करने और पूरे क्षेत्र में बौद्ध विरासत को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों के रूप में भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस पहल से दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और संपर्क और अधिक प्रगाढ़ होंगे।
बता दें कि इस प्रदर्शनी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2025 में श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान की थी। यह कदम भारत की अपनी समृद्ध बौद्ध विरासत को दुनिया के साथ साझा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वैश्विक बौद्ध विरासत के एक जिम्मेदार संरक्षक के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करता है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और प्रधानमंत्री डॉ. हरिणी अमरसूर्या ने कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस पवित्र आयोजन को संभव बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह पहल दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक साबित होगी।
Tagsभगवान बुद्धदेवनीमोरी अवशेषअंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनीश्रीलंकाभारतीय वायुसेनागंगारामया मंदिरबौद्ध धर्मसांस्कृतिक कूटनीतिप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीबौद्ध विरासतजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





