दिल्ली-एनसीआर

पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल की मांग उठी

Kavita2
17 Aug 2026 1:57 PM IST
पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल की मांग उठी
x

नई दिल्ली। भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प दोबारा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। यह सुझाव ऐसे समय में आया है, जब भारत ने देशभर में E20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

वी. अनंत नागेश्वरन और उनके सह-लेखक आकाश पुजारी ने एक लेख में कहा है कि देश के बड़े एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम के साथ-साथ पुरानी गाड़ियों के लिए अलग रणनीति अपनाने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन वाहनों में E20 पेट्रोल के अनुकूल तकनीक नहीं है, उनके मालिकों को E10 पेट्रोल खरीदने का विकल्प दिया जाना चाहिए।

लेख में कहा गया है कि भारत में एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना है। हालांकि, पुराने वाहनों के इंजन में अधिक मात्रा में एथनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को लेकर कुछ तकनीकी चिंताएं सामने आई हैं।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने सुझाव दिया कि नई गाड़ियां E20 पेट्रोल के लिए तैयार हैं और उनमें इसका उपयोग जारी रखा जा सकता है। लेकिन पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने से वाहन मालिकों को सुविधा मिलेगी और संभावित तकनीकी समस्याओं से बचा जा सकेगा।

भारत ने एथनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में एथनॉल की मात्रा लगातार बढ़ाई है। सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना है। E20 पेट्रोल इसी योजना का हिस्सा है, जिसमें पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथनॉल मिलाया जाता है।

एथनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसके इस्तेमाल से पेट्रोलियम आयात में कमी लाने में मदद मिल सकती है। साथ ही इससे किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने वाहनों के इंजन और ईंधन प्रणाली को E20 के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। अधिक एथनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल से कुछ पुराने वाहनों में प्रदर्शन, माइलेज और इंजन के पुर्जों पर असर पड़ने की संभावना जताई जाती है।

इसी को देखते हुए नागेश्वरन और आकाश पुजारी ने सुझाव दिया कि पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प बनाए रखना व्यावहारिक कदम हो सकता है। इससे एथनॉल नीति के उद्देश्यों को भी नुकसान नहीं होगा और वाहन मालिकों को भी राहत मिलेगी।

लेख में यह भी बताया गया कि भारत में बड़ी संख्या में पुराने वाहन अभी भी सड़कों पर चल रहे हैं। इन सभी वाहनों को अचानक E20 ईंधन व्यवस्था के अनुकूल बनाना आसान नहीं होगा। ऐसे में चरणबद्ध तरीके से बदलाव करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईंधन नीति में बदलाव करते समय उपभोक्ताओं की सुविधा और तकनीकी क्षमता दोनों का ध्यान रखना जरूरी है। नई तकनीक वाले वाहन E20 के साथ बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन पुराने वाहनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था आवश्यक हो सकती है।

एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देने के पीछे सरकार के कई उद्देश्य हैं। इसमें कच्चे तेल के आयात बिल को कम करना, प्रदूषण घटाना और घरेलू स्तर पर ईंधन उत्पादन को बढ़ावा देना शामिल है।

भारत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में पेट्रोल में एथनॉल मिलाने से पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। सरकार लंबे समय से जैव ईंधन को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है।

हालांकि, E20 लागू होने के बाद वाहन चालकों के बीच भी कई सवाल उठे हैं। खासकर पुराने वाहन मालिकों में यह चिंता है कि उनके वाहनों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

मुख्य आर्थिक सलाहकार का सुझाव इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए आया है। उनका कहना है कि नई और पुरानी गाड़ियों के लिए अलग-अलग विकल्प रखना ज्यादा संतुलित तरीका हो सकता है।

अब यह सुझाव नीति निर्माताओं के बीच चर्चा का विषय बन सकता है। अगर सरकार इस दिशा में विचार करती है तो पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने की व्यवस्था फिर से शुरू की जा सकती है।

फिलहाल भारत में E20 पेट्रोल का विस्तार जारी है और ऑटोमोबाइल कंपनियां भी नई गाड़ियों को इस ईंधन के अनुरूप तैयार कर रही हैं। आने वाले समय में ईंधन नीति में उपभोक्ताओं की जरूरतों और पर्यावरणीय लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी।

Next Story