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NEET-PG परीक्षा में पारदर्शिता की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

Tara Tandi
2 Oct 2026 12:06 PM IST
NEET-PG परीक्षा में पारदर्शिता की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल
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नई दिल्ली: डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन और NEET-PG 2026 की तैयारी कर रहे डॉक्टरों के एक ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इसमें नेशनल बोर्ड ऑफ़ एग्ज़ामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्ज़ामिनेशन के लिए आंसर की और उम्मीदवारों के जवाब जारी करने के तरीके को चुनौती दी गई है।
वकील सत्यम सिंह राजपूत और नीमा के ज़रिए दायर इस याचिका में NBEMS को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे उम्मीदवारों को परीक्षा के दौरान दिखाए गए असली सवाल और विकल्प, उनके रिकॉर्ड किए गए जवाब, फ़ाइनल सही जवाब और सवाल-वार मार्क्स उपलब्ध कराएं।
NEET-PG 2026 का आयोजन 30 अगस्त को देश भर में कंप्यूटर-बेस्ड परीक्षा के तौर पर किया गया था, जबकि इसका नतीजा 24 सितंबर को घोषित किया गया था।
नतीजे घोषित होने के बाद, कई उम्मीदवारों ने अपने स्कोर को स्वतंत्र रूप से वेरिफ़ाई करने के लिए असली प्रश्न पत्र, ऑफ़िशियल आंसर की और अपने रिकॉर्ड किए गए जवाब देखने की मांग की।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन शिकायतों के बावजूद, NBEMS ने स्टैंडर्ड कम्युनिकेशन के ज़रिए इन आवेदनों का निपटारा कर दिया। इसमें कहा गया कि नतीजा "तथ्यात्मक और सही" था, और कई मामलों में उम्मीदवारों को 24 सितंबर को जारी पब्लिक नोटिस के पॉइंट नंबर 9 का हवाला दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने NBEMS द्वारा 1 अक्टूबर को जारी "NEET-PG 2026 का स्कोरकार्ड और आंसर की" नाम के नोटिस को चुनौती दी है, जिसके तहत उम्मीदवार अपने व्यक्तिगत आवेदक लॉगिन के ज़रिए सवाल-वार मूल्यांकन देख सकते हैं।
याचिका के अनुसार, इस जानकारी में क्वेश्चन ID, रिस्पॉन्स स्टेटस, सही जवाब की न्यूमेरिकल ID, उम्मीदवार द्वारा चुना गया न्यूमेरिकल विकल्प और हर सवाल के लिए दिए गए मार्क्स शामिल हैं।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस सिस्टम में क्वेश्चन ID से जुड़ा असली सवाल या विकल्पों का पूरा टेक्स्ट उसी क्रम में नहीं मिलता है, जिस क्रम में वे परीक्षा के दौरान उम्मीदवार को दिखाए गए थे।
याचिका में कहा गया है, "नतीजतन, उम्मीदवार को एक कोडेड न्यूमेरिकल मैट्रिक्स दिखाया जाता है, लेकिन वह इन पहचानकर्ताओं का मिलान उस चीज़ से नहीं कर पाता जो उसने परीक्षा के दौरान असल में देखी और जिसका जवाब दिया था।"
याचिका में यह भी कहा गया है कि NBEMS सवालों के क्रम और विकल्पों के क्रम, दोनों को ही उम्मीदवार के हिसाब से शफ़ल (बदल) देता है। इसमें कहा गया है, “इस तरह, किसी कैंडिडेट को सिर्फ़ यह बताना कि किसी खास क्वेश्चन ID के लिए ‘ऑप्शन 2’ सही था और ‘ऑप्शन 3’ चुना गया था, इससे कैंडिडेट यह पता नहीं लगा पाता कि असल सवाल क्या था, ऑप्शन 2 और 3 में असल में क्या था, या क्या सही सवाल और ऑप्शन का क्रम उस कैंडिडेट के एग्ज़ामिनेशन रिकॉर्ड से सही ढंग से मैप किया गया है या नहीं।”
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अभी जो जानकारी दी जाती है, उससे भले ही मार्क्स का गणितीय मिलान हो सके, लेकिन इससे मुख्य आंसर की या कैंडिडेट-स्पेसिफिक सवाल-और-ऑप्शन मैपिंग की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं हो पाती।
याचिका में कहा गया है, “असल सवाल और उससे जुड़े ऑप्शन के टेक्स्ट के बिना, कैंडिडेट यह भी ठीक से नहीं समझ पाता कि क्या कोई सवाल अस्पष्ट है, क्या एक से ज़्यादा ऑप्शन सही हो सकते हैं, क्या आधिकारिक तौर पर बताया गया जवाब गलत है, या क्या सवाल, ऑप्शन या रिकॉर्ड किए गए जवाब की कैंडिडेट-स्पेसिफिक मैपिंग में कोई गलती हुई है।”
याचिका में NBEMS से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वह व्यक्तिगत आवेदक लॉगिन के ज़रिए कैंडिडेट-वाइज़ मैप किया गया क्वेश्चन पेपर और रिस्पॉन्स शीट उपलब्ध कराए। इसमें कैंडिडेट को दिखाए गए क्रम में असल सवाल, कैंडिडेट-स्पेसिफिक क्रम में पूरे ऑप्शन, रिकॉर्ड किया गया जवाब, उससे जुड़ा सही जवाब और मिले मार्क्स शामिल होने चाहिए।
इसमें एग्ज़ामिनेशन रिकॉर्ड की डाउनलोड करने योग्य, स्थायी इलेक्ट्रॉनिक कॉपी और असल सवाल और ऑप्शन देखने के बाद कैंडिडेट के लिए सवाल-वाइज़ आपत्तियां उठाने के लिए एक उचित, समय-सीमा वाली व्यवस्था की भी मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने प्रस्ताव दिया है कि एक विधिवत गठित विषय-विशेषज्ञ समिति ऐसी आपत्तियों पर विचार करे और जहां भी गलती साबित हो, वहां स्कोर और रैंक में ज़रूरी सुधार करे।
याचिका में NEET-PG परीक्षाओं में पारदर्शिता और सत्यापन-योग्यता से जुड़ी पिछली कार्यवाहियों का भी ज़िक्र किया गया है, जिसमें पहले के परीक्षा चक्रों में दायर याचिकाएं भी शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया है कि वह भविष्य की पोस्टग्रेजुएट मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में परीक्षा के बाद की पारदर्शिता के लिए उचित दिशानिर्देश या मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) तैयार करे।
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