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सरकारी स्कूल सुधार के लिए मांग मंत्रियों के बच्चे भी लें दाखिला
Ratna Netam
18 Aug 2026 3:52 PM IST

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नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मांग की है कि देश के मंत्रियों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों के बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि जिम्मेदार लोगों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे तो इन स्कूलों की स्थिति में तेजी से सुधार आएगा।
अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन लोगों को भी इसकी जिम्मेदारी महसूस करनी होगी जो शिक्षा व्यवस्था को चलाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी स्कूलों को बेहतर बताया जाता है तो फिर मंत्री, अधिकारी और शिक्षा विभाग से जुड़े लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में क्यों भेजते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा मंत्री, अधिकारी, स्कूलों के प्रिंसिपल और शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे तो उन्हें वहां की वास्तविक समस्याओं का पता चलेगा। इसके बाद स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने, शिक्षकों की व्यवस्था सुधारने और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए तेजी से काम होगा।
सरकारी स्कूलों की स्थिति पर उठाए सवाल
अभिजीत दीपके लगातार सरकारी स्कूलों की सुविधाओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि देश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए गांवों के स्कूलों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से राजनीतिक दलों की ओर से सरकारी स्कूलों को सुधारने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीन पर कई स्कूल आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने स्कूलों में बेहतर भवन, साफ-सफाई, पीने का पानी, शौचालय और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत
अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत उन्होंने स्कूलों की समस्याओं को सामने लाने और स्थानीय स्तर पर सुधार की मांग करने की बात कही है।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अपने आसपास के सरकारी स्कूलों की स्थिति पर नजर रखें और जहां कमियां हैं, उन्हें सामने लाएं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए समाज की भागीदारी भी जरूरी है।
सरकारी स्कूलों में भरोसा बढ़ाने की जरूरत
दीपके का कहना है कि सरकारी स्कूलों में आम लोगों के बच्चों के साथ-साथ देश के नीति निर्माताओं के बच्चों को भी पढ़ना चाहिए। इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लोगों का विश्वास बढ़ेगा और स्कूलों में सुधार के लिए दबाव भी बनेगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी देश के भविष्य की नींव होती है। यदि सरकारी स्कूल मजबूत होंगे तो गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
निजी स्कूलों पर भी उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने निजी स्कूलों की फीस और शिक्षा के व्यवसायीकरण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें हर बच्चे को समान अवसर मिले।
उन्होंने मांग की है कि सरकार को सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के साथ-साथ निजी स्कूलों की फीस और सुविधाओं को लेकर भी प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना
अभिजीत दीपके के इस बयान के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। एक ओर जहां सरकारी स्कूलों में सुधार की मांग लंबे समय से उठती रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारें लगातार नई योजनाओं और सुविधाओं का दावा करती रही हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए केवल बजट बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए शिक्षकों की उपलब्धता, बेहतर प्रबंधन, आधुनिक सुविधाएं और नियमित निगरानी जरूरी है।
कुल मिलाकर अभिजीत दीपके की मांग ने सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। उनका कहना है कि जब जिम्मेदार लोग खुद सरकारी स्कूलों पर भरोसा करेंगे, तभी व्यवस्था में वास्तविक बदलाव आएगा।
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