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दिल्ली-एनसीआर
CJI पर पोस्ट व INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन पर अवमानना की मांग
Tara Tandi
13 Oct 2026 1:19 PM IST

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से संपर्क किया है। उन्होंने कांग्रेस केरल की एक सोशल मीडिया पोस्ट (जिसे अब हटा दिया गया है) और सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष के विरोध मार्च को लेकर 'स्वतः संज्ञान' (suo motu) लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर विचार करने का अनुरोध किया है।
अपनी शिकायत और अर्ज़ी में, वकील विनीत जिंदल ने CJI से यह जांचने का आग्रह किया कि क्या उस पोस्ट और सुप्रीम कोर्ट परिसर के अंदर हुए प्रदर्शन और नारेबाजी से ऐसे मुद्दे उठे हैं जिन पर कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए, खासकर सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा और सुचारू कामकाज को लेकर चिंताओं को देखते हुए।
कांग्रेस केरल यूनिट ने X पर पोस्ट किया था: "प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ लेंगे जो इसे संभाल सके।"
जिंदल ने कहा कि इस पोस्ट की पूरी तथ्यात्मक और कानूनी संदर्भ में जांच की जानी चाहिए ताकि यह तय किया जा सके कि क्या यह स्वीकार्य राजनीतिक आलोचना के दायरे में आता है या 'कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट्स एक्ट, 1971' की धारा 2(c) के तहत इस पर विचार करने की ज़रूरत है।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 129 का हवाला दिया, जो सुप्रीम कोर्ट को अपनी अवमानना के लिए सज़ा देने का अधिकार देता है, और ज़रूरत पड़ने पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही करने का अनुरोध किया।
वकील ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं द्वारा याचिका दायर करने के दौरान हुए प्रदर्शन की भी जांच की मांग की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या बिना अनुमति के किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया गया, सुरक्षा निर्देशों का उल्लंघन किया गया, या शीर्ष अदालत के कामकाज में बाधा डाली गई।
जिंदल ने आग्रह किया कि कोई भी निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित CCTV फुटेज, एक्सेस-कंट्रोल लॉग, सुरक्षा तैनाती रिकॉर्ड और अन्य सबूतों को सुरक्षित रखा जाए और उनकी जांच की जाए।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने अलग-अलग बयानों में CJI के इस्तीफे की मांग करने वाली टिप्पणियों की निंदा की थी और चेतावनी दी थी कि ऐसी टिप्पणियों से न्यायिक गरिमा को नुकसान पहुंचने और न्याय प्रशासन में बाधा आने का खतरा है।
सोमवार को INDIA ब्लॉक का मार्च कथित चुनावी अनियमितताओं और SIR प्रक्रिया के विरोध में आयोजित किया गया था।
इसके बाद विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को चुनौती देते हुए एक संयुक्त याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इस बीच, वकील सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में सोमवार को हुई घटना के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। उस दिन राहुल गांधी समेत विपक्ष के नेता SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल करने पहुंचे थे।
जब सीनियर वकील गौरव भाटिया ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला उठाया, तो CJI ने पूछा, "क्या यह 'मेंशनिंग लिस्ट' में है?" भाटिया के मना करने पर CJI ने कहा, "इसे कल मेंशन करें।"
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने INDIA ब्लॉक के विरोध मार्च के सिलसिले में चार FIR भी दर्ज की हैं। ये मामले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के कथित उल्लंघन के लिए तिलक मार्ग, मंदिर मार्ग और बाराखंबा पुलिस स्टेशनों में दर्ज किए गए।
तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में दो FIR दर्ज की गईं, जबकि मंदिर मार्ग और बाराखंबा पुलिस स्टेशनों में एक-एक FIR दर्ज की गई। इसके अलावा, जंतर-मंतर पर अचानक हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य आशुतोष रंका और सौरव दास भी शामिल थे।
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