दिल्ली-एनसीआर

पुरानी गाड़ियों के लिए अलग ईंधन विकल्प देने की मांग

Ratna Netam
17 Aug 2026 3:44 PM IST
पुरानी गाड़ियों के लिए अलग ईंधन विकल्प देने की मांग
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नई दिल्ली। देशभर में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 लागू होने के बाद पुराने वाहनों के माइलेज और ईंधन प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर जारी बहस के बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि पेट्रोल पंपों पर पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प दोबारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जबकि E20 के अनुकूल नए वाहनों के लिए मौजूदा ईंधन जारी रखा जा सकता है।
नागेश्वरन ने एक लेख में कहा कि भारत को इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से पीछे हटने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय देश में चल रहे पुराने और नए वाहनों की अलग-अलग तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लचीली व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए। पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ कम इथेनॉल वाले E10 पेट्रोल की बिक्री होने से पुराने वाहन मालिकों की चिंताओं को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
E20 पेट्रोल में 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल होता है, जबकि E10 में इथेनॉल की मात्रा 10 प्रतिशत रहती है। सरकार ने अप्रैल 2026 से देशभर में बिकने वाले पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण लागू किया है। इसी अवधि से नए बीएस 6 वाहनों के लिए E20 से संबंधित उत्सर्जन मानकों का पालन भी आवश्यक किया गया है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने इंटरनेट पर प्रसारित उन दावों से असहमति जताई है, जिनमें कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से वाहनों का इंजन तुरंत खराब हो सकता है या माइलेज में 30 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा कम जरूर होती है, लेकिन वास्तविक माइलेज में इतनी बड़ी गिरावट होने का दावा सही नहीं है।
सरकार के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक, कुछ वाहनों में E20 इस्तेमाल करने पर ईंधन दक्षता में लगभग तीन से पांच प्रतिशत की कमी हो सकती है। वास्तविक माइलेज वाहन की तकनीक, रखरखाव, टायर के दबाव, ड्राइविंग के तरीके और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल पर भी निर्भर करता है। इसलिए हर वाहन में ईंधन खपत का प्रभाव एक जैसा नहीं होगा।
सबसे ज्यादा चिंता पुराने दोपहिया वाहनों को लेकर जताई जा रही है। देश में बड़ी संख्या में ऐसे पुराने स्कूटर और मोटरसाइकिल चल रहे हैं, जिनके इंजन E20 को ध्यान में रखकर तैयार नहीं किए गए थे। इनमें खासतौर पर बीएस 4 से पहले के कार्बोरेटर वाले मॉडल शामिल हैं। ऐसे इंजन ईंधन में मौजूद अतिरिक्त ऑक्सीजन के अनुसार मिश्रण को स्वतः समायोजित करने में आधुनिक फ्यूल इंजेक्शन प्रणाली जितने सक्षम नहीं होते।
पुराने वाहनों की रबर सील, फ्यूल लाइन, गैसकेट और ईंधन प्रणाली के कुछ हिस्से भी अधिक इथेनॉल के लंबे संपर्क के लिए डिजाइन नहीं किए गए हो सकते हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि परीक्षणों में इंजन के पुर्जों के घिसने, इंजन ऑयल खराब होने या वाहन के प्रदर्शन से जुड़ी कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई है। वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी की संगतता जानने के लिए निर्माता की पुस्तिका या अधिकृत सर्विस सेंटर से जानकारी लेनी चाहिए।
नागेश्वरन ने इथेनॉल मिश्रण को खाद्य सुरक्षा से जोड़ते हुए E20 से आगे बढ़ने से पहले विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता बताई है। उनका कहना है कि E27 या E30 जैसे अधिक मिश्रण की ओर बढ़ने पर गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उपज की मांग बढ़ेगी। इससे खेती की जमीन और पानी का बड़ा हिस्सा ईंधन उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने की आशंका पैदा हो सकती है।
मक्का जैसी फसल खाद्य सामग्री होने के साथ पशुओं के चारे का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। यदि इसकी बड़ी मात्रा इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होती है तो खाद्य पदार्थों और चारे की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। सरकार के अनुसार अभी 20 प्रतिशत से अधिक मिश्रण बढ़ाने पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और इस्तेमाल होने वाली फसलों की मात्रा उपलब्धता एवं खाद्य जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की जाती है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने सुझाव दिया कि आगे का लक्ष्य तय करने से पहले भोजन और ईंधन के बीच लागत एवं लाभ का व्यापक विश्लेषण किया जाए। साथ ही पुराने वाहनों के लिए E10 और नए वाहनों के लिए E20 उपलब्ध कराकर पर्यावरण, ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ताओं की व्यावहारिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।
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