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दिसंबर से बदलेगी दिल्ली की तस्वीर, डबल-डेकर फ्लाईओवर से सफर होगा आसान

उत्तर-पूर्वी दिल्ली: लाखों वाहन चालकों के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली की पहली इंटीग्रेटेड डबल-डेकर फ्लाईओवर-मेट्रो परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का करीब 88 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और दिसंबर 2026 तक इसके पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है। परियोजना के पूरा होने के बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में जाम की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी और प्रमुख मार्गों पर यातायात पहले से ज्यादा सुगम हो जाएगा।
यह डबल-डेकर फ्लाईओवर परियोजना मंगल पांडेय मार्ग पर बनाई जा रही है, जो सिग्नेचर ब्रिज से भोपुरा बॉर्डर तक करीब 9 किलोमीटर लंबे हिस्से को सिग्नल फ्री बनाने में मदद करेगी। बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की बैठक में इस परियोजना की संशोधित लागत 291 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गई।
यह परियोजना दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की संयुक्त पहल है। इसके निर्माण की जिम्मेदारी डीएमआरसी को दी गई है। दोनों एजेंसियों के बीच 24 फरवरी 2021 को समझौता हुआ था। शुरुआत में इस परियोजना की लागत 220.10 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन निर्माण में आई देरी और अन्य बदलावों के कारण अब इसकी लागत बढ़कर 291 करोड़ रुपये हो गई है।
यह डबल-डेकर फ्लाईओवर यमुना विहार और भजनपुरा मेट्रो स्टेशन के बीच बनाया जा रहा है। इसकी लंबाई करीब 1.40 किलोमीटर होगी। इसका मुख्य उद्देश्य करावल नगर-घोंडा और बृजपुरी टी-प्वाइंट जैसे व्यस्त इलाकों में लगने वाले भारी जाम से लोगों को राहत देना है। इस क्षेत्र में रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं, जिसके कारण पीक ऑवर में घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है।
परियोजना के तहत फ्लाईओवर के ऊपर सड़क यातायात चलेगा, जबकि नीचे मेट्रो कॉरिडोर की सुविधा होगी। दोनों दिशाओं में तीन-तीन लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। इसकी कुल चौड़ाई करीब 23 मीटर होगी। वाहन आवागमन को आसान बनाने के लिए दोनों तरफ 140-140 मीटर लंबे रैंप भी बनाए जा रहे हैं।
निर्माण कार्य की प्रगति की बात करें तो 80 डेक स्लैब में से 74 का काम पूरा हो चुका है। केवल छह डेक स्लैब का काम बाकी है। इसके अलावा 5,600 मीटर लंबे क्रैश बैरियर में से 4,100 मीटर का निर्माण पूरा हो चुका है। 1,500 मीटर का काम अभी शेष है। वहीं, 18 एक्सपेंशन जॉइंट में से 14 लगाए जा चुके हैं।
अंतिम चरण में सड़क की ऊपरी परत बिछाने, बिजली के पोल लगाने, क्रैश बैरियर की पेंटिंग और एंटी-कार्बोनेशन पेंटिंग जैसे कार्य किए जा रहे हैं। परियोजना के तहत 100 बिजली के पोल लगाए जाएंगे, करीब 8,000 वर्गमीटर क्रैश बैरियर की पेंटिंग होगी और 94,900 वर्गमीटर क्षेत्र में एंटी-कार्बोनेशन पेंटिंग की जाएगी।
निर्माण कार्य में वर्ष 2023 के दौरान कुछ अनुमतियों के कारण देरी हुई थी, जिससे परियोजना प्रभावित हुई। हालांकि अब सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। फ्लाईओवर के साथ नई सड़कें, फुटपाथ, रोड साइनेज, ड्रेनेज सिस्टम और वर्षा जल संचयन जैसी सुविधाओं का भी विकास किया जा रहा है।
परियोजना पूरी होने के बाद यमुना विहार और भजनपुरा क्षेत्र का करीब 65 से 70 प्रतिशत यातायात सीधे डबल-डेकर फ्लाईओवर से गुजर सकेगा। इससे नीचे की सड़कों पर केवल स्थानीय वाहनों का दबाव रहेगा और जाम की स्थिति में बड़ी कमी आएगी।
इसके अलावा गोकुलपुरी, खजूरी खास और सिग्नेचर ब्रिज के बीच लोगों को सिग्नल फ्री सफर का लाभ मिलेगा। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि ईंधन की बचत भी होगी और प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है।
दिल्ली की यह डबल-डेकर फ्लाईओवर-मेट्रो परियोजना भविष्य की आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इसके शुरू होने के बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लोगों को तेज, सुरक्षित और बेहतर यातायात सुविधा मिलने की संभावना है।





