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Delhi : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सिटिज़नशिप रूल्स में बड़ा बदलाव

Kavita2
1 May 2026 10:57 AM IST
Delhi : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सिटिज़नशिप रूल्स में बड़ा बदलाव
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Delhi दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को सिटिज़नशिप रूल्स, 2009 में महत्वपूर्ण संशोधन को अधिसूचित किया है। इस बदलाव के तहत ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारकों और नागरिकता आवेदन प्रक्रिया में कई डिजिटल सुधार किए गए हैं। यह बदलाव आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से जारी किया गया, जिसे सिटिज़नशिप (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 के नाम से जाना जाएगा।

नए नियमों के अनुसार नागरिकता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार ने OCI कार्डधारकों के लिए ऑनलाइन आवेदन और त्याग (renunciation) प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई डिजिटल पहल शुरू की हैं। इससे आवेदन प्रक्रिया तेज और सरल होने की उम्मीद है।

संशोधित नियमों में बच्चों से जुड़े प्रावधानों पर विशेष ध्यान दिया गया है। नए प्रावधान के अनुसार, यदि कोई नाबालिग बच्चा भारतीय पासपोर्ट रखता है, तो वह किसी भी स्थिति में किसी अन्य देश का पासपोर्ट एक साथ नहीं रख सकता। यह बदलाव नागरिकता और पासपोर्ट नियमों में स्पष्टता लाने के उद्देश्य से किया गया है।

पहले लागू सिटिज़नशिप रूल्स, 2009 के तहत, विदेश में जन्मे किसी भारतीय नागरिक के नाबालिग बच्चे के जन्म का पंजीकरण संबंधित देश में भारतीय दूतावास या कॉन्सुलेट में कराया जा सकता था। इसके लिए आवेदन के साथ यह घोषणा करनी होती थी कि बच्चे के पास किसी अन्य देश का पासपोर्ट नहीं है।

नए संशोधनों के बाद इस प्रक्रिया को और सख्त और डिजिटल बनाया गया है, ताकि दस्तावेजों की सत्यता और नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सके।

सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य नागरिकता से जुड़ी प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना और अनावश्यक जटिलताओं को कम करना है। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और आवेदकों को बेहतर सुविधा मिलेगी।

OCI कार्डधारकों के लिए भी नई ऑनलाइन सेवाएं शुरू की गई हैं, जिनमें आवेदन जमा करने से लेकर दस्तावेजों की प्रक्रिया और अपडेट तक शामिल हैं। इससे विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आसानी होगी।

Ministry of Home Affairs द्वारा किए गए इन संशोधनों को नागरिकता प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव भारत की नागरिकता और आव्रजन प्रणाली को डिजिटल युग के अनुरूप बनाने में मदद करेगा।

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