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दिल्ली शब्दोत्सव-2026: स्वावलंबन की दिशा में तीनों सेनाएं अग्रणी: पूर्व सैन्य अधिकारी
SHIDDHANT
2 Jan 2026 10:01 PM IST

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Delhi दिल्ली। दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय दिल्ली शब्दोत्सव-2026 के पहले दिन ‘स्वावलंबन से शौर्य’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय नौसेना के पूर्व वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा ने कहा कि स्वावलंबन के क्षेत्र में भारतीय नौसेना सबसे आगे रही है। उन्होंने बताया कि नौसेना ने 1971-72 में ही ‘निलगिरी’ जैसे स्वदेशी युद्धपोतों का निर्माण किया था और आज भी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा ने कहा कि हम अपनी आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएं बनाते हैं, उन पर कार्य करते हैं और समय की मांग के अनुसार उनमें बदलाव भी करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल नौसेना ही नहीं, बल्कि थल सेना, वायु सेना, तीनों सेनाएं स्वावलंबन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। तीनों सेनाओं की जरूरतें अलग-अलग हैं और उसी के अनुरूप कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम में पूर्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) राकेश भदौरिया ने कहा कि एयरोस्पेस उद्योग में भारत आज आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी नींव 1970 के दशक में ही रख दी गई थी। उन्होंने बताया कि एचएएल ने सबसे पहले ‘महारुथ’ परियोजना पर काम किया था, लेकिन कुछ तकनीकी कमियों के कारण उसे आगे नहीं बढ़ाया गया और 80-90 के दशक में भारत आयात पर अधिक निर्भर हो गया। हालांकि, करीब 40 वर्षों के बाद एयरोस्पेस उद्योग में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है।
उन्होंने कहा कि आज भारत एलसीए (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) परियोजना में सफल रहा है और इस पर वायु सेना का भरोसा भी बढ़ा है। देश की एयरोस्पेस इंडस्ट्री अब काफी विकसित हो चुकी है। रक्षा विशेषज्ञ प्रो. राजीव नयन ने कहा कि भारत की सैन्य क्षमता को सामरिक क्षेत्र में लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सामरिक स्वावलंबन न केवल आवश्यक है, बल्कि महाशक्ति बनने के लिए अनिवार्य भी है। उन्होंने कारगिल युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय विदेशी निर्भरता के कारण कीमतें अचानक बढ़ा दी गई थीं। लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) दुष्यंत सिंह ने कहा कि सरकार के साथ-साथ निजी क्षेत्र को भी रक्षा उत्पादन में आगे आना होगा। सरकार को ऐसा अनुकूल वातावरण बनाना चाहिए, जिससे निजी कंपनियों की रक्षा क्षेत्र में भागीदारी बढ़े और देश तेजी से आत्मनिर्भर बन सके।
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