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Delhi : उज्ज्वला योजना में सब्सिडी कटौती पर राहुल गांधी का विरोध

Delhi दिल्ली: केंद्रीय सरकार द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर का सालाना कोटा घटाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कड़ी आलोचना की है। राहुल गांधी ने कहा कि सालाना कोटा पहले नौ सिलेंडर था, जिसे अब चार सिलेंडर तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने इसे गरीब परिवारों और महिलाओं के खिलाफ गंभीर कदम बताया, जो पहले ही महंगाई और बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले LPG की कीमतें बढ़ाई, और अब सब्सिडी कम करने का निर्णय लिया, जिससे गरीबों और विशेष रूप से महिलाएं फिर से गरीबी की ओर धकेली जा रही हैं। उन्होंने कहा, “पहले कीमतें बढ़ाओ, फिर सब्सिडी कम करो और गरीबों का चूल्हा बुझा दो। यह साफ़ तौर पर गरीबों के खिलाफ एक नीतिगत निर्णय है।”
विशेष रूप से 5 किलो के छोटे LPG सिलेंडर की कीमतों में 323 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यह सिलेंडर मुख्य रूप से प्रवासी मज़दूर और छोटे परिवारों द्वारा उपयोग किया जाता है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि इस बढ़ी हुई कीमत के बाद मजदूर अपने रोज़मर्रा के खर्च और खाने-पीने के लिए कैसे प्रबंध करेंगे। उनका मानना है कि यह कदम सरकार की सामाजिक न्याय और गरीबों के कल्याण की नीतियों के विपरीत है।
राहुल गांधी ने सरकार से अपील की कि गरीबों की जरूरतों को देखते हुए सब्सिडी को बढ़ाया जाए और LPG का कोटा फिर से पुराने स्तर पर लाया जाए। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा और रसोई गैस की सुविधा देना था, लेकिन सब्सिडी कम करने और कीमत बढ़ाने से यह मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि LPG कोटा और सब्सिडी में बदलाव ने व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव डाला है। छोटे परिवार और रोज़मर्रा के मजदूर, जो पहले ही महंगाई से परेशान हैं, अब गैस के खर्च को लेकर चिंतित हैं। इस कदम के कारण राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर भी तीखी बहस चल रही है।
राहुल गांधी ने यह भी जोर दिया कि महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए स्वच्छ ईंधन तक पहुँच सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका कहना है कि सब्सिडी घटाने और कीमतें बढ़ाने का फैसला सही समय और सही ढंग से नहीं किया गया है, और इससे सीधे तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग प्रभावित हो रहा है।
कांग्रेस नेता के बयान के बाद, विपक्षी दलों ने भी इस फैसले की आलोचना शुरू कर दी है और कहा है कि सरकार गरीबों के अधिकारों और कल्याण पर ध्यान दे।





