दिल्ली-एनसीआर

दिल्ली पुलिसकर्मी पर छेड़छाड़ का आरोप

Kiran
4 Oct 2026 9:15 AM IST
दिल्ली पुलिसकर्मी पर छेड़छाड़ का आरोप
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Delhi एक महिला कंटेंट क्रिएटर ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने उनके साथ मारपीट की, गलत तरीके से छुआ और धक्का दिया, जब वह विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिरासत में लिए जाने का वीडियो बना रही थीं। इस घटना ने महिलाओं की सुरक्षा, जवाबदेही और अपने कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतों को संभालने के तरीके को लेकर पुलिस बल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुद को कंटेंट क्रिएटर बताने वाली महिला ने एक वीडियो में आरोप लगाया कि जब वह नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने का वीडियो बना रही थीं, तब ACP विवेक भगत ने उनके साथ मारपीट की। महिला ने कहा कि इसके बाद वह FIR दर्ज कराने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन गईं, लेकिन वहां करीब साढ़े तीन घंटे तक इंतजार करने के बाद भी FIR दर्ज नहीं की गई।
इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, पुलिस ने पुष्टि की है कि शिकायत दर्ज की गई है। बाद में पुलिस अधिकारी ने स्टेशन के बाहर जमा लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि शिकायत की जांच के बाद ही FIR दर्ज की जाएगी। पुलिस ने कहा कि यह मामला एक महिला पुलिस अधिकारी को सौंपा जाएगा। यह प्रतिक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तुरंत सवाल यह नहीं है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ, बल्कि यह है कि पुलिस अपने ही अधिकारी के खिलाफ लगे आरोप से कैसे निपटती है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 के तहत, तीन साल या उससे अधिक लेकिन सात साल से कम की सजा वाले संज्ञेय अपराधों में, डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) के पद से नीचे के अधिकारी की पूर्व अनुमति से प्रारंभिक जांच की जा सकती है। ऐसी जांच 14 दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए। भारतीय न्याय संहिता की धारा 74, जो किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमले या आपराधिक बल के प्रयोग से संबंधित है, में एक से पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान है।
इस घटनाक्रम ने CJP विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिसिंग के व्यापक मामले में इस घटना को फिर से चर्चा में ला दिया है। भगत वही ACP हैं जो जुलाई में आंदोलन के दौरान हुई झड़पों में घायल हो गए थे। दिल्ली पुलिस ने तब कहा था कि उन पर पत्थरों और अन्य चीजों से हमला किया गया था। रिपोर्टों में कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात कही गई थी।
पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर, शिकायतकर्ता के समर्थन में मीडियाकर्मी और कंटेंट क्रिएटर जमा हुए। पुलिस ने धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए भीड़ को तितर-बितर होने की चेतावनी दी और कहा कि ऐसा न करने पर हिरासत में लिया जा सकता है। इस मामले में अब दो ज़िम्मेदारियाँ एक साथ सामने आई हैं - विरोध प्रदर्शनों के दौरान व्यवस्था बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना कि किसी पुलिस अधिकारी पर दुर्व्यवहार के आरोप वाली शिकायत पर पारदर्शी और कानूनी रूप से सही कार्रवाई हो।
राहुल ने आरोपों को लेकर पुलिस से सवाल किए
राहुल गांधी ने X पर एक पोस्ट में कहा: "एक महिला पत्रकार ने जंतर-मंतर पर एक पुलिस अधिकारी पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है।" घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ़ एक मांग के साथ वहाँ बैठे हैं कि FIR दर्ज की जाए। क्या यह पुलिस का बुनियादी कर्तव्य नहीं है? उन्होंने ऐसा भी नहीं किया। आज ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप हैं। "और यह पहली बार नहीं है। हमने पहले भी पुलिस अधिकारियों को महिलाओं के साथ घिनौना दुर्व्यवहार करते हुए वीडियो में देखा है। दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है। अमित शाह जी, आप कहाँ हैं? आपको इसका जवाब देना होगा," राहुल ने कहा।
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