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Delhi अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने हिमांशु भाऊ गैंग के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इन पर जबरन वसूली, हत्या, शूटर्स को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने और गैंग के वित्तीय लेन-देन को संभालने का आरोप है। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान गाजियाबाद के लोनी निवासी मुर्सलीन उर्फ गुल्लू (25) और हरियाणा के भिवानी निवासी नवीन (29) के रूप में हुई है। ये दोनों इंटरनेट-आधारित सुरक्षित कम्युनिकेशन ऐप्स के जरिए गैंग के सरगनाओं के संपर्क में थे।
पुलिस के अनुसार, ये गिरफ्तारियां संगठित अपराध के खिलाफ स्पेशल सेल द्वारा चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा हैं। पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली थी कि कुछ युवक हिमांशु भाऊ गैंग के शूटर्स को लॉजिस्टिक सपोर्ट दे रहे हैं। इस जानकारी पर तुरंत कार्रवाई करते हुए, एक विशेष टीम को गैंग के सदस्यों पर नजर रखने और शूटर्स की मदद करने वालों के बारे में जानकारी जुटाने के काम पर लगाया गया। डीसीपी (स्पेशल सेल, एनडीआर) नरा चैतन्य ने एक बयान में बताया कि लगातार कोशिशों के बाद, टीम ने ऐसे कई सदस्यों की पहचान की जो फरार शूटर्स को लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया करा रहे थे।
11 अक्टूबर को टीम ने गुल्लू को पकड़ा और उसके पास से एक पिस्तौल और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि जनवरी 2026 में वह विशाखापत्तनम में गैंग के दो शार्पशूटर्स के संपर्क में आया था। ये शूटर्स दिल्ली-एनसीआर में अपराध करने के बाद वहां छिपे हुए थे। डीसीपी ने बताया कि इसके बाद वह एक फील्ड ऑपरेटिव के तौर पर गैंग में शामिल हो गया। उसने भाऊ से शूटर्स तक पैसे पहुंचाने में मदद की और उनके होटल में रुकने के लिए फर्जी आईडी का इंतजाम किया। अगस्त 2026 में गैंग के शार्पशूटर्स की गिरफ्तारी के बाद, भाऊ ने गुल्लू को एक शूटर के तौर पर तैयार किया और उसे हथियार दिए। वह किसी टारगेट की हत्या करने या रेकी (निगरानी) करने के निर्देश का इंतजार कर रहा था, तभी उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
गुल्लू से मिली जानकारी के आधार पर, भिवानी से नवीन को गिरफ्तार किया गया। उसे भी उन्हीं शूटर्स ने गैंग में शामिल किया था। शुरुआत में, उसने अपना बैंक अकाउंट देकर भाऊ से शूटर्स तक पैसे पहुंचाने में मदद की और बाद में गैंग के लिए हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने (कूरियर) का काम करने लगा। अधिकारी ने बताया कि वह भी सुरक्षित इंटरनेट-आधारित संचार एप्लिकेशन के ज़रिए गिरोह के सरगना के संपर्क में था।
अधिकारी के अनुसार, आरोपी से पूछताछ में गिरोह के ढांचे और काम करने के तरीके के बारे में अहम जानकारियां मिली हैं। इससे पता चला है कि गिरोह के सरगना अपने गुर्गों का इस्तेमाल करके युवाओं को शूटर और लॉजिस्टिक्स (साजो-सामान) उपलब्ध कराने वालों के तौर पर भर्ती करते हैं। साथ ही, विदेश में बैठे सरगना एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफॉर्म के ज़रिए आपराधिक गतिविधियों का समन्वय करते हैं। इस कार्रवाई से गिरोह के मंसूबों पर पानी फिर गया है और उनके वित्तीय तथा लॉजिस्टिक्स सपोर्ट सिस्टम को बड़ा झटका लगा है।
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