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Delhi : 1,444 करोड़ की बड़ी जब्ती, चार राज्यों और पुडुचेरी में कैश, शराब और सामान बरामद

Kavita2
7 May 2026 5:03 PM IST
Delhi : 1,444 करोड़ की बड़ी जब्ती, चार राज्यों और पुडुचेरी में कैश, शराब और सामान बरामद
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Delhi दिल्ली: देश में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में बड़ी मात्रा में नकदी, शराब और मुफ्त बांटे जाने वाले सामान की जब्ती दर्ज की गई है। 26 फरवरी से 6 मई के बीच चुनावी निगरानी के दौरान कुल 1,444.96 करोड़ रुपये की जब्ती की गई, जो वर्ष 2021 की तुलना में 40.14 प्रतिशत अधिक है।

आंकड़ों के अनुसार, 2021 में इसी अवधि के दौरान 1,029.93 करोड़ रुपये की जब्ती हुई थी। इस बार चुनावी निगरानी व्यवस्था के तहत जब्त की गई वस्तुओं में नकदी के साथ-साथ शराब और अन्य प्रलोभन देने वाली सामग्री भी शामिल है।

राज्यों के आधार पर देखें तो सबसे अधिक जब्ती तमिलनाडु में दर्ज की गई, जहां 662.28 करोड़ रुपये की नकदी और सामान बरामद किए गए। इसके बाद पश्चिम बंगाल का स्थान रहा, जहां 573.41 करोड़ रुपये की जब्ती हुई। असम में 117.24 करोड़ रुपये, केरल में 80.67 करोड़ रुपये और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 9.72 करोड़ रुपये की जब्ती दर्ज की गई।

विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में जब्ती के मामलों में 68.92 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि तमिलनाडु में यह आंकड़ा 2021 के चुनावों की तुलना में 48.4 प्रतिशत अधिक रहा। यह बढ़ोतरी चुनाव आयोग की सख्त निगरानी और प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रियता को दर्शाती है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पश्चिम बंगाल के फाल्टा निर्वाचन क्षेत्र को छोड़कर इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद चुनावी गतिविधियों की निगरानी कड़ी की गई थी। इसके तहत चुनावी प्रलोभनों पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाए गए।

आंकड़ों के अनुसार, चुनाव ज़ब्ती प्रबंधन प्रणाली (Election Seizure Management System - ESMS) के लागू होने के 39 दिनों के भीतर ही 154.89 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई। इस प्रणाली ने चुनावी खर्च और अवैध धन के प्रवाह पर निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया।

चुनाव आयोग और प्रवर्तन एजेंसियों ने बताया कि इस तरह की जब्तियां चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं, ताकि मतदाताओं को किसी भी प्रकार के प्रलोभन से प्रभावित होने से रोका जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती जब्ती यह संकेत देती है कि चुनावों के दौरान अवैध धन और सामग्री के इस्तेमाल को रोकने के लिए निगरानी प्रणाली को और अधिक सख्त किया गया है। हालांकि, यह भी स्पष्ट हुआ है कि अभी भी चुनावी प्रक्रियाओं में ऐसे प्रयास पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।

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