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दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का पुनर्गठन, तिलक राज कटारिया बने उपाध्यक्ष

नई दिल्ली। दिल्ली में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है। उपराज्यपाल ने बोर्ड में तीन नई नियुक्तियों को मंजूरी दी है। इनमें तिलक राज कटारिया को बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि कविता राठौर और मोहन गोयल को गैर-सरकारी सदस्य बनाया गया है।
इन नियुक्तियों के साथ दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के कामकाज को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का उद्देश्य खादी, ग्रामीण उद्योगों और छोटे उद्यमों को बढ़ावा देना है, ताकि रोजगार के अवसरों का विस्तार हो सके।
दिल्ली राजपत्र में जारी हुई अधिसूचना
दिल्ली सरकार के उद्योग आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी दिल्ली राजपत्र की असाधारण अधिसूचना में इन नियुक्तियों की जानकारी दी गई है।
अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड अधिनियम, 1966 के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उपराज्यपाल ने बोर्ड का पुनर्गठन किया है।
इस अधिनियम के तहत सरकार को बोर्ड में पदाधिकारियों और सदस्यों की नियुक्ति करने का अधिकार प्राप्त है। इसी के तहत नई नियुक्तियां की गई हैं।
तिलक राज कटारिया को मिली बड़ी जिम्मेदारी
तिलक राज कटारिया को दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया है। उपाध्यक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारी बोर्ड की योजनाओं को आगे बढ़ाने और खादी व ग्रामोद्योग से जुड़े कार्यों को गति देने की होगी।
खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र लंबे समय से रोजगार सृजन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का माध्यम रहा है। ऐसे में बोर्ड के नेतृत्व में नई नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उम्मीद है कि नए पदाधिकारियों के आने से बोर्ड की योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और दिल्ली में खादी क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा।
कविता राठौर और मोहन गोयल बने सदस्य
बोर्ड में कविता राठौर और मोहन गोयल को गैर-सरकारी सदस्य नियुक्त किया गया है। गैर-सरकारी सदस्यों की भूमिका बोर्ड की नीतियों और योजनाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण होती है।
वे अपने अनुभव और सुझावों के माध्यम से बोर्ड के कामकाज में योगदान देंगे। खादी और ग्रामोद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी रहेगी।
खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने पर जोर
खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र देश में आत्मनिर्भरता और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। छोटे कारीगरों, ग्रामीण उद्यमियों और स्थानीय उत्पादकों को प्रोत्साहित करने में खादी बोर्ड की अहम भूमिका होती है।
दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड भी इसी उद्देश्य के तहत काम करता है। बोर्ड के माध्यम से खादी उत्पादों की बिक्री, प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं को बढ़ावा दिया जाता है।
नई नियुक्तियों के बाद बोर्ड से उम्मीद की जा रही है कि वह छोटे उद्यमियों और कारीगरों के लिए नई पहल शुरू करेगा।
दिल्ली सरकार की कई समितियों और आयोगों का गठन
हाल के समय में दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े आयोगों और बोर्डों के गठन की प्रक्रिया तेज हुई है। महिला आयोग, अल्पसंख्यक आयोग और बाल आयोग के बाद अब खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का भी पुनर्गठन किया गया है।
इन संस्थाओं के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर काम करने और योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने का प्रयास किया जाता है।
खादी बोर्ड के पुनर्गठन को भी इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
रोजगार और स्थानीय उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। विशेष रूप से छोटे कारीगर, बुनकर, हस्तशिल्प से जुड़े लोग और ग्रामीण उद्यमी इससे जुड़े होते हैं।
बोर्ड की नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन क्षेत्रों को मजबूत करना और अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं से जोड़ना होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि खादी उत्पादों की मांग बढ़ रही है और यदि बेहतर विपणन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए तो यह क्षेत्र और मजबूत हो सकता है।
बोर्ड की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
दिल्ली जैसे बड़े शहर में खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देना एक अलग चुनौती है। यहां बाजार की संभावनाएं अधिक हैं, लेकिन छोटे उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना पड़ता है।
ऐसे में बोर्ड की भूमिका केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करना भी जरूरी होगा।
नई नियुक्तियों के बाद बोर्ड से उम्मीद की जा रही है कि वह खादी उत्पादों की पहुंच बढ़ाने, कारीगरों को सहयोग देने और नए अवसर पैदा करने पर ध्यान देगा।
प्रशासनिक स्तर पर बढ़ेगी सक्रियता
उद्योग आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद अब बोर्ड के कामकाज में तेजी आने की संभावना है। नई टीम के गठन के बाद बैठकों और योजनाओं की समीक्षा शुरू हो सकती है।
सरकार की कोशिश है कि खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र को आधुनिक जरूरतों के अनुसार विकसित किया जाए और इससे जुड़े लोगों को अधिक लाभ मिल सके।
आगे की रणनीति पर नजर
दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के पुनर्गठन के बाद अब सभी की नजर बोर्ड की आगामी योजनाओं पर रहेगी। नई नियुक्तियां खादी क्षेत्र में नई पहल और विकास की उम्मीद जगा रही हैं।
तिलक राज कटारिया के नेतृत्व में बोर्ड किस तरह काम करता है और खादी एवं ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाते हैं, इस पर अब ध्यान रहेगा।





