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Delhi दिल्ली भारत और जर्मनी ने अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) के संरक्षण और उनके सही इस्तेमाल के लिए 'इरादे के संयुक्त घोषणापत्र' (Joint Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए। यह वेटलैंड मैनेजमेंट में वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने और बेहतरीन तरीकों को साझा करने की दिशा में एक नया कदम है। इस घोषणापत्र पर चौथे भारत-जर्मन पर्यावरण फोरम (IGEF) के दौरान हस्ताक्षर किए गए, जो पर्यावरण नीति पर दोनों देशों के बीच सबसे ऊंचे स्तर का द्विपक्षीय मंच है। यह फोरम 2008 से आयोजित किया जा रहा है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ विकास (environmental sustainability) पर जर्मनी के साथ अपनी साझेदारी को बहुत महत्व देता है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग सालों से जारी है और पर्यावरण से जुड़े कामकाज के नए क्षेत्रों तक इसका विस्तार हुआ है।
फोरम को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ विकास को अब अकेले हासिल नहीं किया जा सकता और जलवायु-अनुकूल भविष्य बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के विकास के अनुभव ने यह दिखाया है कि पर्यावरण से जुड़े लक्ष्यों और आर्थिक विकास को एक-दूसरे का विरोधी होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार अपने 'राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान' (NDC) के तहत किए गए वादों को समय से पहले पूरा कर रहा है, जो देश में हो रहे पर्यावरण से जुड़े बड़े बदलावों को दिखाता है। यादव ने औद्योगिक बदलाव के अगले चरण में स्टील, सीमेंट और केमिकल जैसे ज्यादा ऊर्जा की खपत वाले सेक्टरों को डीकार्बोनाइज (कार्बन उत्सर्जन कम करना) करने की चुनौती की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने फोरम से पर्यावरण से जुड़े फैसलों के लिए जानकारी और सबूतों के आधार को मजबूत करने, जलवायु कार्रवाई, जैव विविधता संरक्षण और संसाधनों के कुशल इस्तेमाल के लिए व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों को आगे बढ़ाने और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान देने का आह्वान किया।
जर्मनी के पर्यावरण, जलवायु संरक्षण, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा मंत्री कार्स्टन श्नाइडर ने कहा कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) के तेजी से विस्तार ने उसे दुनिया के अन्य क्षेत्रों के लिए एक रोल मॉडल बना दिया है। श्नाइडर ने कहा कि भारत और जर्मनी का साझा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि टिकाऊ विकास और आर्थिक विकास साथ-साथ चलें। जलवायु अनुकूलन और वेटलैंड संरक्षण पर बढ़े हुए सहयोग का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश संयुक्त परियोजनाओं पर काम करेंगे और जानकारी व अनुभव साझा करेंगे।
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