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दिल्ली-एनसीआर
JNU प्रोफेसर की बर्खास्तगी पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Kiran
3 Nov 2026 9:57 AM IST

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दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) प्रशासन के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसके तहत प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते नौकरी से निकाल दिया गया था। जस्टिस अनूप जे. भंभानी ने अकोइजम की याचिका पर यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया। अकोइजम ने अपनी बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती दी है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए जनवरी की तारीख तय की है।
अकोइजम, जो इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं, JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई में कम से कम 11 छात्राओं ने प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अकोइजम ने छात्राओं को मीटिंग या किसी कार्यक्रम के बहाने कैंपस स्थित अपने आवास पर बुलाया और उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने क्लास के दौरान अश्लील और अनुचित टिप्पणियां कीं।
इससे पहले 12 अक्टूबर को, यूनिवर्सिटी के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप में FIR दर्ज की थी। रविवार को वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई इस FIR में BNS की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 लगाई गई हैं।
9 अक्टूबर को जारी अपने बर्खास्तगी आदेश में यूनिवर्सिटी ने कहा कि यह जांच "यौन उत्पीड़न के आरोपों" के आधार पर की गई थी और आंतरिक समिति ने लागू सेवा नियमों के तहत "कड़ी सजा" देने की सिफारिश की थी। अकोइजम ने यूनिवर्सिटी की इस कार्रवाई और उसके बाद मीडिया में आई कवरेज को "राजनीतिक प्रतिशोध" (political witch hunt) करार दिया है। साथ ही, उन्होंने जांच प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी (procedural irregularities) का भी आरोप लगाया है।
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