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नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस के कई मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अभिनेता की सजा रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव की दोषसिद्धि और सजा पहले की तरह कायम रहेगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि निचली अदालत द्वारा दिए गए फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता है। इसके साथ ही अभिनेता की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट के फैसले से राजपाल यादव को बड़ा झटका लगा है।
मामला चेक बाउंस से जुड़े कई मामलों का है। इन मामलों में निचली अदालत ने अभिनेता को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके बाद राजपाल यादव ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में निचली अदालत के आदेश को रद्द करने की मांग की थी।
राजपाल यादव की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि निचली अदालत के फैसले पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए और उन्हें राहत दी जानी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब अभिनेता के खिलाफ चेक बाउंस मामलों में पहले से जारी दोषसिद्धि और सजा प्रभावी रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में निचली अदालत के फैसले को बदलने का कोई पर्याप्त कारण नहीं है।
चेक बाउंस के मामले आमतौर पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दर्ज किए जाते हैं। इसमें यदि किसी व्यक्ति द्वारा जारी किया गया चेक बैंक में भुगतान के लिए जमा करने पर पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो जाता है, तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस तरह के मामलों में आरोपी को अदालत में अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है। यदि अदालत में आरोप साबित हो जाते हैं तो दोषी व्यक्ति को जुर्माना या अन्य कानूनी सजा का सामना करना पड़ सकता है।
राजपाल यादव बॉलीवुड के जाने-माने हास्य कलाकारों में शामिल हैं। उन्होंने कई फिल्मों में अपने अभिनय से पहचान बनाई है। हालांकि, पिछले कुछ समय से वह कानूनी मामलों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब अभिनेता के सामने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को ही आगे भुगतना होगा। अदालत के आदेश ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आर्थिक लेन-देन और चेक से जुड़े मामलों में अदालतें गंभीरता से फैसला लेती हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, चेक बाउंस मामलों में अदालतें शिकायतकर्ता के अधिकारों और वित्तीय लेन-देन की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए निर्णय देती हैं। ऐसे मामलों में समय पर भुगतान और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना बेहद जरूरी होता है।
फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजपाल यादव की याचिका खारिज हो गई है और निचली अदालत का आदेश प्रभावी बना रहेगा।





