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दिल्ली HC ने CBI जांच मांग वाली याचिका पर विचार से किया मना

Ratna Netam
21 Sept 2026 4:25 PM IST
दिल्ली HC ने CBI जांच मांग वाली याचिका पर विचार से किया मना
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलने और बाद में उसे हटाए जाने के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। याचिका में इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच सीबीआई या विशेष जांच दल (SIT) से कराने की मांग भी की गई थी।मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय के अधिकार (लोकस स्टैंडी) पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों और सक्षम मजिस्ट्रेट के पास जाने का वैकल्पिक कानूनी रास्ता मौजूद है।
याचिका पर अदालत ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वह सीधे हाईकोर्ट में याचिका लेकर क्यों आए हैं, जबकि कानून के तहत पहले अन्य उपाय उपलब्ध हैं। अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को एफआईआर दर्ज कराने की मांग करनी है तो वह पहले पुलिस और फिर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन कर सकता है।अदालत ने याचिका पर आगे सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि इस स्तर पर वह मामले को स्वीकार नहीं कर रही है।
कोर्ट ने कही कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमित बंसल ने याचिका को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की। अदालत ने कहा, **"मैं इस पर विचार नहीं कर रहा हूं, श्रीमान। यह एक जंगली चुड़ैल का शिकार है। आपके पास करने के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं है?"**अदालत की यह टिप्पणी याचिका की प्रकृति और उसे दाखिल करने के आधार को लेकर की गई। हालांकि, कोर्ट ने मामले में कोई जांच संबंधी आदेश जारी नहीं किया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से कथित रूप से नकदी मिलने से जुड़ा है। आरोप लगाया गया था कि उनके आवास पर बड़ी मात्रा में मुद्रा मिली थी और बाद में उसे हटाया गया।इस घटना के बाद न्यायपालिका और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा शुरू हुई थी। मामले से जुड़े तथ्यों की जांच और आगे की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग स्तरों पर प्रक्रिया चली।
याचिका में क्या मांग की गई थी?
अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय की ओर से दायर याचिका में मांग की गई थी कि इस मामले में एफआईआर दर्ज की जाए और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।याचिकाकर्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई या विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की थी। उनका तर्क था कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी जरूरी है।
अदालत ने बताया वैकल्पिक रास्ता
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मामले में आपराधिक शिकायत दर्ज कराने के लिए कानून में तय प्रक्रिया मौजूद है। शिकायतकर्ता पहले पुलिस के पास जा सकता है और यदि वहां कार्रवाई नहीं होती तो मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन कर सकता है।अदालत ने इसी आधार पर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का मामला चर्चा में क्यों आया
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे हैं। उनके आवास से कथित नकदी मिलने के मामले ने न्यायपालिका में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी थी।ऐसे मामलों में न्यायिक संस्थानों की ओर से निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत कार्रवाई की जाती है। किसी भी आरोप की वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होती है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद याचिकाकर्ता के पास अन्य कानूनी विकल्प मौजूद हैं। वह पुलिस या मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत प्रक्रिया अपना सकते हैं।फिलहाल हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने या सीबीआई/SIT जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिका की स्वीकार्यता और याचिकाकर्ता के अधिकार को लेकर सवाल उठाते हुए इसे आगे बढ़ाने से मना किया।मामला न्यायपालिका से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे से संबंधित होने के कारण आगे भी कानूनी और सार्वजनिक चर्चा में बना रह सकता है। हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच और संबंधित संस्थानों की आधिकारिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
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