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Delhi HC ने MLA नरेश बालियान के खिलाफ जांच में देरी पर पुलिस को फटकारा

NEW DELHI नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस को AAP विधायक नरेश बाल्यान के खिलाफ कथित संगठित अपराध से जुड़े एक मामले में जांच पूरी करने में हुई देरी के लिए फटकार लगाई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने बाल्यान की ज़मानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि जांच में तेज़ी लाई जानी चाहिए, क्योंकि वह 'महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम' (MCOCA) जैसे सख़्त कानून के तहत दर्ज इस मामले में 2024 से जेल में हैं। जज ने टिप्पणी करते हुए कहा, "अगर आप जांच ही करते रहेंगे, तो आरोपों पर सुनवाई कब होगी? जब कोई व्यक्ति जेल में हो, तो आप दो साल तक हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकते।"
यह टिप्पणी तब आई, जब कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि क्या बाल्यान के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए हैं। पुलिस ने इसका जवाब 'नहीं' में दिया और बताया कि आगे की जांच अभी भी जारी है। जज ने पूछा, "उन्होंने यह अपराध किया है या नहीं, यह तो ट्रायल का विषय है। लेकिन कम से कम आपको आरोप तय करने की प्रक्रिया में तो तेज़ी लानी चाहिए। वह 2024 से जेल में हैं। अब 2026 आ गया है... आप इसमें इतनी देरी क्यों कर रहे हैं?" कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह 30 मार्च तक एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करे और मामले की मौजूदा स्थिति (स्टेटस रिपोर्ट) कोर्ट में जमा करे।
कोर्ट में अन्य मामले
कपिल के खिलाफ FIR दर्ज करने की अर्जी खारिज एक कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ 2020 के दिल्ली दंगों के सिलसिले में FIR दर्ज करने की मांग वाली एक अर्जी को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अर्जी खारिज करने का कारण यह बताया कि इसके लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं थे। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने मोहम्मद इलियास की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। इलियास ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि कपिल मिश्रा और कुछ अन्य लोगों ने विक्रेताओं की रेहड़ियों को नुकसान पहुंचाया था। पुलिस ने इस अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि कपिल मिश्रा को इस मामले में जान-बूझकर फंसाने की कोशिश की जा रही है।





