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दिल्ली HC के आदेश से छेड़छाड़ जांच के आदेश

Ratna Netam
22 Sept 2026 3:13 PM IST
दिल्ली HC के आदेश से छेड़छाड़ जांच के आदेश
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नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अपने ही एक पुराने न्यायिक आदेश में कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आने पर गंभीरता दिखाई है। कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सक्षम अधिकारी को इसकी जांच करने का निर्देश दिया है। यह मामला दिल्ली के खेड़ा खुर्द गांव के विस्तारित लाल डोरा क्षेत्र में स्थित 175 वर्ग गज जमीन के एक प्लॉट से जुड़ा है।यह आदेश 18 सितंबर 2026 को जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने मीना देवी और एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में पुलिस की ओर से उचित कार्रवाई नहीं की गई। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ऐसा दस्तावेज पेश किया गया, जिसे हाई कोर्ट के 19 नवंबर 2024 के एक पुराने आदेश के रूप में बताया गया था।
175 वर्ग गज जमीन से जुड़ा है विवाद
मामला खेड़ा खुर्द गांव के विस्तारित लाल डोरा क्षेत्र में स्थित करीब 175 वर्ग गज के प्लॉट से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में शिकायत की गई कि संपत्ति से जुड़े मामले में कथित धोखाधड़ी और जालसाजी की गई है।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन कथित तौर पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया।कोर्ट के समक्ष रखे गए विवरण के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने इस मामले को लेकर 7 सितंबर 2026 को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में पुलिस कमिश्नर को विस्तृत शिकायत भी दी थी। शिकायत में संपत्ति से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और दस्तावेजों से संबंधित आरोपों का उल्लेख किया गया था।
सुनवाई के दौरान सामने आया पुराना आदेश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने RSA 101/2024 में 19 नवंबर 2024 को पारित दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के तौर पर एक दस्तावेज का हवाला दिया। इसी दौरान अदालत के सामने यह मुद्दा आया कि जिस दस्तावेज को पुराने न्यायिक आदेश के रूप में पेश किया गया है, उसमें कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई है।न्यायिक आदेश अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा होते हैं। ऐसे में किसी न्यायिक आदेश की सामग्री में कथित बदलाव या छेड़छाड़ का सवाल सामने आने पर अदालत ने मामले की जांच की आवश्यकता महसूस की।कोर्ट ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए सक्षम अधिकारी को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है।
पुलिस कमिश्नर को पहले दी गई थी शिकायत
अदालत के आदेश के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने पहले ही 7 सितंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में पुलिस कमिश्नर के समक्ष विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में संपत्ति विवाद से जुड़े कथित धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए गए थे।याचिकाकर्ताओं की शिकायत का मुख्य मुद्दा यह भी था कि पुलिस की ओर से उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।अब अदालत के निर्देश के बाद जांच का दायरा केवल संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि उस दस्तावेज की प्रामाणिकता और उसमें कथित बदलाव के आरोपों की भी जांच की जा सकती है।
न्यायिक रिकॉर्ड की प्रामाणिकता अहम
किसी अदालत के आदेश में कथित छेड़छाड़ का मामला इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि न्यायिक रिकॉर्ड पर अदालतों, पक्षकारों और अन्य संबंधित संस्थाओं का भरोसा निर्भर करता है। अदालत के किसी आदेश की कॉपी का इस्तेमाल आगे की कानूनी कार्यवाही में किया जा सकता है।ऐसे में यदि किसी दस्तावेज में वास्तविक आदेश से अलग सामग्री पाई जाती है तो यह जांच का विषय बन जाता है कि दस्तावेज कहां से तैयार हुआ, उसे किसने पेश किया और उसमें कथित बदलाव कैसे हुआ।हालांकि इस मामले में कथित छेड़छाड़ के लिए कौन जिम्मेदार है, यह अभी जांच का विषय है। अदालत के निर्देश का उद्देश्य संबंधित तथ्यों और दस्तावेज की प्रामाणिकता की जांच कराना है।
कोर्ट ने सक्षम अधिकारी को जांच के निर्देश दिए
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 18 सितंबर को पारित आदेश में सक्षम अधिकारी को इस मामले की जांच करने को कहा है। जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों की तुलना अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड से की जा सकती है।इसके अलावा यह भी देखा जा सकता है कि 19 नवंबर 2024 को RSA 101/2024 में वास्तव में क्या आदेश पारित हुआ था और सुनवाई के दौरान पेश किए गए दस्तावेज में उससे कोई अंतर है या नहीं।जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता तय किया जाएगा।
संपत्ति विवाद से शुरू हुआ मामला
शुरुआत में यह मामला 175 वर्ग गज के प्लॉट से जुड़े कथित धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों तथा पुलिस की कार्रवाई नहीं होने की शिकायत से जुड़ा था। लेकिन सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के पुराने आदेश से संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद मामला एक अलग महत्वपूर्ण पहलू तक पहुंच गया।अब सक्षम अधिकारी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि संबंधित दस्तावेज वास्तविक न्यायिक आदेश से मेल खाता है या नहीं और यदि उसमें कोई बदलाव पाया जाता है तो उसकी प्रकृति क्या है।फिलहाल अदालत ने जांच के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही कथित छेड़छाड़ के संबंध में जिम्मेदारी और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस मामले में अदालत का आदेश न्यायिक रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और दस्तावेजों की विश्वसनीयता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल को सामने लाता है।
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