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दिल्ली-एनसीआर
Delhi HC के फैसले से चार देशों में वीजा प्रक्रिया प्रभावित, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार
nidhi
18 July 2026 8:11 AM IST

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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दलील दी
Delhi: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा चार देशों में कांसुलर, पासपोर्ट और वीजा (CPV) सेवाओं के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था। सरकार का कहना है कि इस आदेश के कारण भारतीय मिशनों में सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो गई हैं और लाखों भारतीय नागरिकों, ओसीआई कार्डधारकों तथा विदेशी वीजा आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में अबू धाबी (यूएई), कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया) स्थित भारतीय मिशनों में कांसुलर, पासपोर्ट और वीजा सेवाओं के लिए अपनाई गई निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़े गंभीर प्रश्न हैं और सरकार को नई निविदा (RFP) जारी करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद चारों देशों में आउटसोर्स की जाने वाली कांसुलर, पासपोर्ट और वीजा सेवाएं लगभग ठप हो गई हैं। सरकार के अनुसार—
भारतीय मिशनों को अपने कर्मचारियों को आपात सेवाओं में लगाना पड़ा है।
सामान्य वीजा और पासपोर्ट सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक, OCI कार्डधारक और विदेशी आवेदक प्रभावित हो रहे हैं।
इसलिए मामले में तत्काल सुनवाई और अंतरिम राहत आवश्यक है।
किन देशों पर पड़ा असर?
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का प्रभाव इन चार भारतीय मिशनों पर पड़ा है—
अबू धाबी (संयुक्त अरब अमीरात)
कुवैत
सिंगापुर
कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया)
इन स्थानों पर आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से पासपोर्ट, वीजा, OCI, दस्तावेज़ सत्यापन और अन्य कांसुलर सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
हाई कोर्ट ने टेंडर क्यों रद्द किया?
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं थी। अदालत के अनुसार—
मूल्यांकन के आधार स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किए गए।
कुछ बोलीदाताओं को अयोग्य ठहराने के कारण पर्याप्त रूप से नहीं बताए गए।
पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष सार्वजनिक खरीद (Public Procurement) के मानकों पर खरी नहीं उतरती।
इन्हीं कारणों से अदालत ने टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करते हुए नए सिरे से निविदा जारी करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट में अब क्या होगा?
केंद्र सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। अब शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि—
क्या हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई जाए?
क्या मौजूदा व्यवस्था को अस्थायी रूप से जारी रखा जाए?
या नई निविदा प्रक्रिया के दौरान कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए?
भारतीय नागरिकों पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि सेवाएं लंबे समय तक बाधित रहती हैं, तो प्रभावित देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य आवेदकों को—
पासपोर्ट नवीनीकरण में देरी,
वीजा आवेदन के निस्तारण में विलंब,
OCI और दस्तावेज़ सत्यापन सेवाओं में परेशानी,
कांसुलर सहायता प्राप्त करने में अतिरिक्त समय
जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि भारतीय मिशन आपातकालीन सेवाएं जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय की चिंता
केंद्र का कहना है कि विदेशों में भारतीय मिशनों की बड़ी संख्या आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कांसुलर सेवाएं संचालित करती है। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया रद्द होने से केवल प्रशासनिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की दैनिक जरूरतें भी प्रभावित होती हैं।
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